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150 करोड़ का महाघोटाला ! बैंक के डिप्टी वाइज प्रेजिडेंट गिरफ्तार,नगर निगम के पैसों की लूट—कोटक बैंक का नाम सामने आया।

पंचकूला । राजवीर दीक्षित

(₹150 crore mega scam! A bank’s Deputy Vice President has been arrested for embezzling municipal corporation funds — Kotak Bank’s name has also surfaced.)हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने बुधवार को कोटक महिंद्रा बैंक के डिप्टी वाइस-प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह को पंचकूला नगर निगम (MC) के धन के दुरुपयोग से जुड़े 150 करोड़ रुपये के घोटाले में गिरफ्तार किया।

पुष्पेंद्र सिंह ने सुबह SV&ACB के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में यह छठी गिरफ्तारी है और उन्हें गुरुवार को अदालत में पेश किया जाएगा।

आरोप है कि उन्होंने पंचकूला नगर निगम के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर धोखाधड़ी से नगर निगम के नाम पर दो बैंक खाते खोले और वैध खातों से धन इन खातों में ट्रांसफर किया।

मई 2020 में दोनों ने कथित तौर पर नगर निगम, पंचकूला के नाम पर एक फर्जी बैंक खाता (खाता संख्या 2015073031) खोला। इस खाते के फॉर्म पर कौशिक ने कथित तौर पर नगर निगम आयुक्त और सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर की आधिकारिक मुहरें लगाईं। इसके अलावा, दोनों ने तत्कालीन आयुक्त IAS सुमेधा कटारिया और सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर सुशील कुमार के हस्ताक्षर भी जाली बनाए।

इसके बाद जून 2022 में, दोनों ने मिलकर कोटक महिंद्रा बैंक में नगर निगम के नाम पर एक और फर्जी खाता (खाता संख्या 2046279112) खोला। इस खाते के फॉर्म पर कौशिक ने खुद को सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर बताकर हस्ताक्षर किए और डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर (DMC) की नकली मुहर लगाई। इस पर भी उन्होंने तत्कालीन DMC दीपक सूरा के हस्ताक्षर जाली बनाए।

आरोप है कि कौशिक फर्जी डेबिट नोट (RTGS/NEFT) तैयार करता था, जिन पर वह खुद एक हस्ताक्षरकर्ता के रूप में साइन करता और दूसरे हस्ताक्षरकर्ता के हस्ताक्षर जाली बनाता था। इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए पुष्पेंद्र सिंह नगर निगम के धन को इन फर्जी खातों से अपने निजी खातों में ट्रांसफर करता था।

इसके बाद यह धन आगे राजत दहरा, स्वाति तोमर और अन्य लोगों के खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, अंततः यह पैसा विभिन्न बिल्डरों को दिया जाता था, ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके।
SV&ACB के मुताबिक, राजत दहरा को नगर निगम के फंड से 70 करोड़ रुपये मिले थे।

जुलाई 2025 और फरवरी 2026 में जब नगर निगम ने अपनी एफडी और खातों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, तो कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप सिंह राघव ने कौशिक से संपर्क किया। कौशिक ने उसे पुष्पेंद्र के साथ समन्वय करने और ईमेल के जरिए गलत जानकारी देने को कहा। इसके बाद फर्जी बैंक स्टेटमेंट और नकली एफडी एडवाइस तैयार कर नगर निगम को भेजे गए।

बुधवार को पंचकूला की अदालत में सुनवाई के दौरान SV&ACB ने कहा कि पुष्पेंद्र सिंह और विकास कौशिक दोनों ही फर्जी दस्तावेजों और नकली मुहरों के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं, इसलिए आमने-सामने पूछताछ जरूरी है। अदालत ने कौशिक की पुलिस हिरासत दो दिन और बढ़ा दी।

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि इन्हीं दोनों आरोपियों ने पूरी आपराधिक साजिश रची और सरकारी धन का गबन किया।

एफआईआर के अनुसार, नगर निगम ने बैंक की सेक्टर 11 शाखा में 16 एफडी में 145.03 करोड़ रुपये जमा किए थे, जिनकी परिपक्वता राशि 158.02 करोड़ रुपये थी। इनमें से 11 एफडी (59.58 करोड़ रुपये) 16 फरवरी को परिपक्व हुईं। जब नगर निगम ने बैंक से संपर्क किया, तो अधिकारियों ने ऐसे स्टेटमेंट दिए जो न तो आपस में मेल खाते थे और न ही नगर निगम के रिकॉर्ड से, खासकर एफडी के मामले में।

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