चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Now ₹10,000 pension instead of ₹5,000! A big gift from the Government of India.”) केंद्र की भारत सरकार अब असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। बढ़ती महंगाई और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार अटल पेंशन योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन राशि को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह करने पर विचार कर रही है।
भारत में कुल कार्यबल का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा असंगठित क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, घरेलू कामगार, मजदूर और स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इन लोगों के पास न तो स्थायी आय होती है और न ही पीएफ जैसी सुविधाएं, ऐसे में यह योजना उनके लिए बुढ़ापे में आर्थिक सहारा बन सकती है।
साल 2015 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य 60 वर्ष की उम्र के बाद लोगों को निश्चित पेंशन उपलब्ध कराना है। फिलहाल इस योजना के तहत ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है, लेकिन मौजूदा महंगाई के दौर में यह राशि पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 9 करोड़ लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं, हालांकि इनमें से लगभग आधे लोगों ने नियमित योगदान देना बंद कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना में 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं, जो एक रिकॉर्ड है।
इस प्रस्ताव पर पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण और वित्त मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। सरकार इस योजना को “पेंशन सखी” और बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट्स के जरिए गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी में है।
खास बात यह है कि 26 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने इस योजना को 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन राशि बढ़ाने से सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह योजना मुख्य रूप से लोगों के योगदान पर आधारित है।



















