चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“5000 Stipend Announced, Students Face New Challenges”) हिमाचल प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य के 10 सरकारी डिग्री कॉलेजों को बंद करने और उन्हें जिला मुख्यालय स्थित बड़े कॉलेजों में विलय करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के भविष्य और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
सरकार का कहना है कि जिन कॉलेजों में छात्रों की संख्या बेहद कम थी, उन्हें बेहतर संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़े संस्थानों में मर्ज किया जा रहा है। प्रभावित कॉलेजों में टिक्कर, भलेई, कुकुमसेरी, कुपवी, संधोल, मुल्थान, जैनगर, ननखड़ी, रोहाट और कोटली जैसे कॉलेज शामिल हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन संस्थानों में नए दाखिले नहीं होंगे।
छात्रों को राहत देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की है। जिन विद्यार्थियों को मर्ज किए गए कॉलेजों से जिला मुख्यालय के कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा, उन्हें ₹5000 प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाएगा। हालांकि, यह सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जो सरकार द्वारा निर्धारित कॉलेजों में अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।
सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठने लगे हैं। कई अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए उन्हें किराया, रहने और अन्य खर्चों का सामना करना पड़ेगा, जो ₹5000 स्टाइपेंड से कहीं अधिक हो सकते हैं। विशेष रूप से लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी कॉलेज के छात्रों को अब कुल्लू जाकर पढ़ाई करनी पड़ सकती है।
इस फैसले ने एक बार फिर राज्य में शिक्षा नीति, संसाधनों के उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की उपलब्धता को लेकर बड़ी चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और अधिक गरमा सकता है।



















