नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित
(Amid Iran–Israel Tensions, India Asserts Preparedness; Claims 80-Day Fuel Reserves)पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि भारत के पास 76 से 80 दिनों की आवश्यकता के बराबर ईंधन भंडार उपलब्ध है और देश किसी भी संभावित वैश्विक तेल संकट से निपटने के लिए तैयार है।
मंत्री ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि फिलहाल भारत के सामने कोई तत्काल ऊर्जा संकट नहीं है और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता की आवश्यकता नहीं है।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, रिफाइनरियों का स्टॉक तथा व्यावसायिक भंडारण पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। उनके अनुसार यदि होर्मुज जलडमरूमध्य अस्थायी रूप से बंद भी हो जाता है तो भारत के पास 30 से 60 दिनों तक की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता है।
उन्होंने बताया कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है। साथ ही संयुक्त अरब अमीरात जैसे मित्र देशों का सहयोग भी भारत को प्राप्त है। आवश्यकता पड़ने पर एलपीजी सहित अन्य ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।
पुरी ने कहा कि यदि यह संघर्ष कई महीनों तक जारी रहता है तो वैश्विक आर्थिक स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि लंबे समय तक जारी युद्ध विश्व स्तर पर आर्थिक मंदी का कारण बन सकता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे बड़े वैश्विक ऊर्जा संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया है। उस दौरान भी सरकार ने उपभोक्ताओं को ईंधन कीमतों में भारी बढ़ोतरी से बचाने का प्रयास किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार की दिशा तय करेगा और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता।



















