चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
(Punjab and Haryana High Court’s Big Ruling on Police Arrests: Know the Rules or Face Legal Consequences) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिखित कारण बताना केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया अनिवार्य अधिकार है। यदि पुलिस इस प्रक्रिया का पालन नहीं करती, तो ऐसी गिरफ्तारी संवैधानिक रूप से दोषपूर्ण और असंवैधानिक मानी जाएगी।
न्यायमूर्ति वीरेंद्र अग्रवाल ने यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों से निकले कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए की। अदालत ने गिरफ्तारी से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किए हैं और कहा कि मजिस्ट्रेट का भी यह कर्तव्य है कि वह आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले यह सुनिश्चित करे कि संविधान और कानून में निर्धारित सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के कारण आरोपी को लिखित रूप में और उस भाषा में दिए जाने चाहिए जिसे वह आसानी से समझ सके। इतना ही नहीं, इन कारणों की एक प्रति आरोपी द्वारा नामित किसी रिश्तेदार, मित्र या अन्य व्यक्ति को भी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के कारण आरोपी और उसके नामित व्यक्ति को जल्द से जल्द बताए जाने चाहिए। साथ ही, आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष रिमांड के लिए पेश किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले यह जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वह अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और कानूनी सहायता प्राप्त करने के अपने संवैधानिक अधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।
यह महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायमूर्ति वीरेंद्र अग्रवाल ने अधिवक्ता विपुल जिंदल के माध्यम से दायर एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान की। हाईकोर्ट के इस फैसले को गिरफ्तार व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय माना जा रहा है।



















