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विधायक के बेटे को मिली कमान, AAP नेता की दावेदारी धरी रह गई

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“MLA’s Son Wins Top Post, AAP Leader’s Claim Rejected”) पंजाब की राजनीति में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब नगर निगम के नए मेयर के चुनाव में विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुन लिया गया। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, क्योंकि आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मेयर पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे डॉ. सत्ती आहलूवालिया की दावेदारी अंतिम समय में खारिज हो गई।

मेयर चुनाव के दौरान पार्टी नेतृत्व ने एकजुटता का संदेश देते हुए सरबजीत सिंह समाना को जिम्मेदारी सौंपी। वहीं आरपी शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चरी को डिप्टी मेयर चुना गया। परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई और नए मेयर के स्वागत में रोड शो भी निकाला गया।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चुनाव से पहले तक डॉ. सत्ती आहलूवालिया को सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था। संगठन में उनकी अच्छी पकड़ और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ करीबी संबंधों की भी चर्चा थी। लेकिन अंतिम समय में बदले राजनीतिक समीकरणों ने पूरा खेल बदल दिया।

बताया जा रहा है कि नगर निगम में अधिकांश पार्षद विधायक कुलवंत सिंह के करीबी माने जाते हैं, जिसका असर मेयर चुनाव में साफ दिखाई दिया। इसी के चलते सरबजीत सिंह समाना का पलड़ा भारी रहा और उन्हें मेयर पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के पार्षदों ने चुनाव का बहिष्कार किया। वहीं निगम भवन में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। इस चुनाव के बाद शहर की राजनीति में विधायक कुलवंत सिंह और उनके परिवार का प्रभाव और मजबूत माना जा रहा है। अब सभी की नजरें नए मेयर की कार्यशैली और शहर के विकास को लेकर उनके आगामी फैसलों पर टिकी हैं।

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