चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Teachers’ Salaries Stopped Over Drug Survey Duty “) पंजाब में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जालंधर जिला प्रशासन ने सर्वे की ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने वाले कम से कम 84 सरकारी स्कूल शिक्षकों का जून महीने का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि इन शिक्षकों को सर्वे के लिए एन्यूमरेटर नियुक्त किया गया था और उन्हें 11 जून तथा 23 जून को चुनाव शाखा कार्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए थे। कई बार नोटिस और फोन पर याद दिलाने के बावजूद वे ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, जिसे सरकारी आदेशों की अवहेलना और लापरवाही माना गया।
वहीं, शिक्षक संगठनों ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले सर्वे में भागीदारी को स्वैच्छिक बताया था, लेकिन अब शिक्षकों पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है। सरकारी अध्यापक यूनियन के जिला अध्यक्ष कर्नैल सिंह फिल्लौर ने आरोप लगाया कि वेतन रोककर शिक्षकों को मजबूर किया जा रहा है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला सचिव अवतार लाल ने भी कहा कि शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
इसी बीच, वेतन रोके जाने वाले शिक्षकों में शामिल स्वर्ण सिंह ने बताया कि उन्होंने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किया था और उन्हें ड्यूटी से छूट मिलने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार फोन कर ड्यूटी जॉइन करने और वेतन रोकने की चेतावनी दी जा रही है।
हालांकि, अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) दिव्या पी ने कहा कि इतनी सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि जालंधर में अब तक केवल 40 प्रतिशत सर्वे पूरा हुआ है और करीब 300 एन्यूमरेटर की कमी है। प्रशासन शिक्षकों से बातचीत कर समाधान निकालेगा और जहां अभी सर्वे ड्यूटी नहीं लगी है, वहां से कर्मचारियों की तैनाती कर कमी पूरी की जाएगी।



















