द टारगेट न्यूज डेस्क।
(“AI to Power GST Tax Monitoring; Businesses to Get Faster Refunds “) देश में 1 जुलाई को GST लागू होने के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर केंद्र सरकार टैक्स सिस्टम को और अधिक स्मार्ट, पारदर्शी और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। अब सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से GST निगरानी, टैक्स चोरी की पहचान और रिफंड प्रक्रिया को तेज़ करने की तैयारी में है। इसका सबसे बड़ा फायदा MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मिलेगा, क्योंकि उनकी अनुपालन लागत कम होगी और टैक्स से जुड़े काम पहले से अधिक आसान हो जाएंगे।
सरकार GST, इनकम टैक्स और कस्टम ड्यूटी के डेटाबेस को आपस में जोड़ रही है, ताकि जोखिम का सही आकलन किया जा सके और टैक्स चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से संदिग्ध लेनदेन की पहचान तेज़ होगी, जिससे मैन्युअल जांच कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
गौरतलब है कि 1 जुलाई 2017 को देश में GST लागू किया गया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “गुड एंड सिंपल टैक्स” बताते हुए ऐतिहासिक कर सुधार कहा था। GST लागू होने के बाद देश के 17 तरह के टैक्स और 13 प्रकार के सेस को एकीकृत कर “वन नेशन, वन टैक्स” की अवधारणा को मजबूत किया गया।
पिछले 10 वर्षों में GST के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है। वहीं, औसत मासिक GST संग्रह 89,700 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। हालांकि पेट्रोल, डीजल, कच्चा तेल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस अभी भी GST के दायरे से बाहर हैं। सरकार का मानना है कि AI आधारित टैक्स सिस्टम से कारोबारियों को तेज़ रिफंड, आसान अनुपालन और पारदर्शी कर व्यवस्था का लाभ मिलेगा।



















