चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“IAS Officer Pradeep Dagar Arrested on Retirement Day”) हरियाणा के चर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रदीप डागर को उनके रिटायरमेंट वाले दिन गिरफ्तार कर लिया। CBI का आरोप है कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के खातों से करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में उनकी भूमिका सामने आई है। इस मामले में सरकार पहले ही 8 अप्रैल 2026 को उन्हें निलंबित कर चुकी थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रदीप डागर लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद CBI ने उन्हें हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन उससे पहले ही CBI ने कार्रवाई कर दी।
यह मामला हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बैंक खातों में 169 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा है। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक डेटा एंट्री ऑपरेटर ने दावा किया था कि एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के निर्देश पर यह राशि चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा के माध्यम से ट्रांसफर की गई। आरोप है कि बाद में यह पैसा कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए बाहर निकाला गया।
प्रदीप डागर अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक HSPCB में सदस्य सचिव रहे थे। CBI ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी भी प्राप्त की है। इस मामले में बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
गौरतलब है कि इस मामले में प्रदीप डागर तीसरे IAS अधिकारी हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले IAS अधिकारी आर.के. सिंह और पंकज अग्रवाल भी गिरफ्तार हो चुके हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में CBI की जांच तेज हो गई है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



















