चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Rahul Gandhi Steps In as Punjab Congress Crisis Deepens “) पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। विदेश दौरे से लौटते ही राहुल गांधी सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने पहुंचे, जहां पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब में संगठन के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है। एक ओर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अपने पद पर कायम हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेतृत्व में बदलाव की मांग पर अड़े हुए हैं। चन्नी गुट चाहता है कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी संगठन में बड़े बदलाव किए जाएं।
भूपेश बघेल ने हाल ही में पंजाब का दौरा कर 60 से अधिक नेताओं से मुलाकात की और उनकी राय हाईकमान तक पहुंचाई। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि आगामी विधानसभा चुनाव किसी मुख्यमंत्री चेहरे पर नहीं, बल्कि राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इस बयान के बाद चन्नी खेमे की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
बताया जा रहा है कि चरणजीत सिंह चन्नी भी राहुल गांधी से मुलाकात के लिए दिल्ली पहुंच सकते हैं। उनकी कोशिश है कि हाईकमान के सामने अपनी बात सीधे रखी जाए। वहीं, कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सभी पक्षों की राय सुनकर अंतिम निर्णय करना चाहता है।
अब सबकी नजर राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी है। क्या पंजाब कांग्रेस में जारी बगावत थमेगी या फिर संगठन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा? यह फैसला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस के लिए यह सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है।



















