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प्रेम संबंधों के कारण लड़का-लड़की के घर से भागने की घटनाओं पर सरकार कैसे लगाएगी रोक? ‘पॉक्सो’ कानून के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“How Will the Government Stop Couples from Eloping Due to Love Affairs? Supreme Court Expresses Concern Over Misuse of POCSO “) सुप्रीम कोर्ट ने प्रेम संबंधों में घर छोड़कर भागने वाले नाबालिग लड़का-लड़की के मामलों और ऐसे मामलों में POCSO (पॉक्सो) कानून के इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार या प्रशासन प्रेम संबंधों के कारण किसी लड़के और लड़की के घर से भाग जाने की घटनाओं को कैसे रोक सकता है।

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि कई मामलों में जब नाबालिग लड़की अपनी मर्जी से अपने साथी के साथ चली जाती है, तो परिवार अपनी कथित “इज्जत” बचाने के लिए लड़के के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करा देता है। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 15 से 18 वर्ष की आयु बेहद संवेदनशील होती है। यह वह दौर है जब किशोर मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक बदलावों से गुजरते हैं। ऐसे में हर आपसी सहमति वाले संबंध को स्वतः पॉक्सो का मामला मान लेना उचित है या नहीं, इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है।

यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई, जो कलकत्ता हाई कोर्ट के वर्ष 2023 के एक विवादित फैसले के बाद सामने आया था। उस फैसले में नाबालिग लड़कियों को रिश्तों में पड़ने के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर “नियंत्रण” रखने की सलाह दी गई थी, जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक बार फिर इस बहस को तेज कर सकती है कि नाबालिगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि कानून का उद्देश्य भी पूरा हो और उसका दुरुपयोग भी न हो।

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