द टारगेट वेब डेस्क
(‘Instagram Becomes Gen-Z’s Political Powerhouse! “) देश में सोशल मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जो Instagram कभी सिर्फ रील्स, फैशन और मनोरंजन का प्लेटफॉर्म माना जाता था, वह अब राजनीतिक संवाद और जनमत तैयार करने का सबसे प्रभावशाली माध्यम बनकर उभर रहा है। खासकर Gen-Z यानी युवा पीढ़ी अब सिर्फ कंटेंट देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी आवाज बुलंद करने, सरकार से सवाल पूछने और सामाजिक मुद्दों पर अभियान चलाने के लिए Instagram का जमकर इस्तेमाल कर रही है।
हाल ही में NEET परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों के दौरान Instagram पर चलाए गए कैंपेन, रील्स, पोस्टर और मीम्स ने लाखों युवाओं तक अपनी पहुंच बनाई। इन डिजिटल अभियानों ने स्थानीय विरोध को राष्ट्रीय बहस में बदलने में अहम भूमिका निभाई। छात्र संगठनों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोअर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत साफ नजर आई।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल की कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को Instagram पर युवाओं से अधिक संवाद बढ़ाने और सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सलाह दी। इसके बाद परीक्षा सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर साझा किए गए उनके वीडियो को करोड़ों व्यूज मिले और बड़ी संख्या में नए फॉलोअर्स भी जुड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी लंबे भाषणों की बजाय छोटे वीडियो, रील्स, इन्फोग्राफिक्स और विजुअल कंटेंट को अधिक पसंद करती है। यही कारण है कि राजनीतिक दल, सरकार और सामाजिक संगठन अब डिजिटल कंटेंट के जरिए अपनी बात सीधे युवाओं तक पहुंचा रहे हैं।
आने वाले चुनावों में Instagram, YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं। बदलते दौर में यह साफ हो गया है कि अब राजनीति सिर्फ मंचों और रैलियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर चलने वाली रील्स भी जनमत और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की ताकत रखती हैं।



















