चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Private Schools Get Major Relief? Centre Says States Can Regulate Fees, HC Hearing Today “) पंजाब में निजी स्कूलों की फीस को लेकर चल रहे विवाद के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों की फीस तय करने, उसे नियंत्रित करने और नियमों का पालन करवाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। यह जवाब लोकसभा में सांसद राजकुमार चब्बेवाल के सवाल पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने दिया।

केंद्र ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राज्य सरकारें फीस रेगुलेटरी कमेटी (FRC) बनाकर निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण कर सकती हैं। यदि कोई स्कूल निर्धारित नियमों से अधिक फीस वसूलता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो राज्य शिक्षा विभाग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। जरूरत पड़ने पर जुर्माना लगाने या मान्यता रद्द करने तक का अधिकार भी राज्यों के पास है।
पंजाब सरकार ने हाल ही में नया कानून लागू करते हुए निजी स्कूलों को सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत फीस बढ़ाने की सीमा तय की है। साथ ही, स्कूल किसी एक तय दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामान खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकते।
हालांकि, पंजाब के निजी स्कूल संचालकों ने इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि केवल 5 प्रतिशत फीस वृद्धि की सीमा से शिक्षकों के वेतन, स्कूलों के रखरखाव और अन्य बढ़ते खर्चों को पूरा करना मुश्किल होगा। स्कूल प्रबंधन ने पुराने वर्षों में बढ़ाई गई फीस वापस करने और विभिन्न शुल्कों को फीस में शामिल करने जैसे प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। कोर्ट का फैसला तय करेगा कि पंजाब सरकार का नया फीस रेगुलेशन कानून लागू रहेगा या इसमें कोई बदलाव होगा। यह फैसला लाखों छात्रों, अभिभावकों और निजी स्कूलों के भविष्य पर सीधा असर डाल सकता है।



















