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यूपीआई पर MDR शुल्क को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- पीएम ने NOTA को नए मायने दिए

यूपीआई पर MDR शुल्क को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- पीएम ने NOTA को नए मायने दिए

टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: डिजिटल इंडिया के दावों के बीच यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की चर्चाओं ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने इस कदम को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय आम जनता और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

कांग्रेस का तंज: ‘पीएम ने NOTA को नए मायने दिए’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘NOTA’ (None of the Above) को एक नया अर्थ दे दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का मतलब अब ‘No One Taxed Anyway’ से बदलकर ‘New Opportunities to Tax All’ हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि यूपीआई पर शुल्क लगाने से डिजिटल अर्थव्यवस्था की गति धीमी हो सकती है।

विपक्ष के मुख्य आरोप

  • डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने से छोटे व्यापारियों का मुनाफा घटेगा।
  • आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन में कमी आ सकती है।
  • सरकार ‘कैशलेस इंडिया’ के अपने ही वादों से पीछे हट रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘जब देश डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा था, तब सरकार का यह कदम जनता के विश्वास को तोड़ने वाला है। यूपीआई को मुफ्त रखना ही इसकी सफलता का मूल मंत्र था, जिसे अब शुल्क के दायरे में लाकर सरकार अपनी विफलता छिपा रही है।’

सरकार का रुख और भविष्य की चुनौतियां

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है, लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए वित्तीय स्थिरता जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एमडीआर लागू होता है, तो फिनटेक कंपनियों और बैंकों के बीच एक नई बहस छिड़ सकती है। फिलहाल, यह मामला संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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