चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Sewer Workers Deaths: 27 Lives Lost in a Decade, Safety Crisis Deepens “) पंजाब में सीवर सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले 10 वर्षों में राज्य में कम से कम 27 सीवर कर्मचारियों की मौत जहरीली गैस और असुरक्षित परिस्थितियों में सीवर साफ करते हुए हो चुकी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के आंकड़ों के अनुसार, 1993 से अब तक पंजाब में कुल 51 सीवर कर्मचारियों की जान जा चुकी है, जबकि दो मृतक परिवारों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है।
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पूरे पंजाब में सफाई कर्मचारी और सीवरमैन हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं—नौकरी नियमित करना, आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना और सुरक्षा उपकरण जैसे गैस मास्क, सेफ्टी किट और अन्य आवश्यक संसाधन देना। कर्मचारियों का कहना है कि केवल वेतन बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती।

आंकड़ों के मुताबिक लुधियाना में सबसे ज्यादा 15 मौतें, मोहाली में 8, बठिंडा में 7, अमृतसर में 6, फिरोजपुर में 5 और जालंधर में 3 कर्मचारियों की मौत दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी सेप्टिक टैंकों में होने वाली मौतों का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है।
हाल ही में राज्य सरकार ने सफाई कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ाकर ₹20,500 करने की घोषणा की, लेकिन यूनियन का कहना है कि बिना आधुनिक सक्शन और जेटिंग मशीनों के कर्मचारियों को आज भी सीवर में उतरना पड़ता है, जिससे हर दिन उनकी जान खतरे में रहती है।
देशभर की बात करें तो 1993 से अब तक 1,370 सीवर कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक मौतें तमिलनाडु (264) और गुजरात (209) में दर्ज की गई हैं, जबकि हरियाणा 128 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक सीवर कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ेगा और उन्हें सुरक्षित कार्यस्थल तथा सम्मानजनक रोजगार मिलेगा।



















