चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Pilot holds sway in Punjab Congress; stern message on factionalism) पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने पार्टी की कमान संभालते ही नेताओं को साफ संदेश दे दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव तक संगठन में कलेक्टिव लीडरशिप और हाईकमान का फैसला सर्वोपरि रहेगा। पायलट के आने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग एक मंच पर नजर आए।
पायलट का फोकस पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को खत्म कर संगठन को चुनाव के लिए एकजुट करने पर है। पार्टी ने उन्हें भूपेश बघेल की जगह पंजाब का प्रभारी बनाया है और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग खेमों को साथ लेकर चलने की है।
पायलट के 3 बड़े संदेश
1. हाईकमान का फैसला अंतिम
पायलट ने संकेत दिया कि पंजाब कांग्रेस में किसी एक नेता या गुट को मनमानी की छूट नहीं होगी। पार्टी के फैसले हाईकमान के निर्देश और सामूहिक नेतृत्व के आधार पर होंगे।
2. कार्यकर्ताओं की बात सीधे सुनी जाएगी
पायलट ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि अगर स्थानीय स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी जाती तो वे सीधे उनके सामने अपनी समस्या रख सकते हैं। उनका जोर संगठन को नीचे से मजबूत करने पर है।
3. युवाओं को मिलेगा फोकस
पायलट ने पंजाब की राजनीति में युवाओं की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने युवाओं को एकजुट होकर पार्टी को मजबूत करने का संदेश दिया।
चन्नी-वड़िंग को एक मंच पर लाने में कामयाबी
पायलट की पहली बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस के दो प्रमुख खेमों को साथ लाना थी। चन्नी और वड़िंग लंबे समय से पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग रुख रखते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति के बाद दोनों पक्षों ने सार्वजनिक तौर पर उनके नेतृत्व में सहयोग का संकेत दिया है।
हालांकि, इससे यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि दोनों खेमों के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म हो गए हैं। पार्टी के भीतर गुटीय खींचतान अभी भी चुनौती बनी हुई है।
CM चेहरे पर भी साफ रुख
पायलट ने यह भी स्पष्ट किया है कि कांग्रेस पंजाब चुनाव में पहले से किसी मुख्यमंत्री चेहरे को घोषित नहीं करेगी। पार्टी कलेक्टिव लीडरशिप के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री का फैसला किया जाएगा।
कुल मिलाकर, पायलट की एंट्री के बाद पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अब चुनौती यह होगी कि मंच पर दिख रही एकजुटता को बूथ और संगठन के स्तर तक कितना कायम रखा जा सकता है।



















