चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
ईडी ने यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर अमेरिकी जांच एजेंसी FBI से मिली जानकारी के बाद दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोगों को ऑनलाइन निशाना बनाकर करोड़ों डॉलर की ठगी कर रहे थे।
जांच में खुलासा हुआ कि Digikaps नाम से संचालित अवैध कॉल सेंटर में 36 कर्मचारी काम कर रहे थे यह गिरोह खुद को टेक्निकल सपोर्ट सेवा का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करता था। इसके बाद पीड़ितों की गोपनीय जानकारी हासिल कर उन्हें अमेरिका की इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) की कार्रवाई का डर दिखाया जाता था।
आरोपी लोगों को रकम क्रिप्टोकरेंसी अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे। ठगी से जुटाई गई रकम को शेल कंपनियों, विशेष रूप से Bliss Infra Properties LLP, के जरिए रियल एस्टेट में निवेश किया गया।
इस वर्ष जनवरी और फरवरी में ईडी ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
कार्रवाई के दौरान कई डिजिटल उपकरण, 34 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी और ऐसे दस्तावेज बरामद हुए, जिनसे भारत और विदेशों में की गई महंगी संपत्तियों में निवेश के सबूत मिले।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह से जुड़े आरोपियों ने ठगी की रकम को हरियाणा, दिल्ली और गोवा में रियल एस्टेट परियोजनाओं में लगाया। ईडी मामले में आगे की जांच कर रही है और अन्य संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।



















