चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित
(President Approves Tough Anti-Paper Leak Law; Fast-Track Courts to Ensure Speedy Trials — Know All the Key Details)देशभर में सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर अब और सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह संशोधित कानून लागू हो गया है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

नए कानून के तहत अब राज्य सरकारें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित कर सकेंगी।
इन मामलों की जांच तेजी से होगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद रोजाना सुनवाई करते हुए तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी अधिकार दिया गया है।
संशोधित कानून में दोषियों के लिए सजा और जुर्माना दोनों को काफी बढ़ा दिया गया है।
अब पेपर लीक या अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं, अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रोक लगेगी।
यह कानून उन प्रमुख परीक्षाओं पर लागू होगा, जिन्हें UPSC, SSC, RRB, IBPS और NTA जैसी संस्थाएं आयोजित करती हैं, जिनमें NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कई राज्यों में पेपर लीक के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े किए थे। इन्हीं घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने सख्त कानून लाने का फैसला किया। अब उम्मीद की जा रही है कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित होगी।



















