रोपड़ । राजवीर दीक्षित
(Accumulated debris released into the Sutlej from Ropar Headworks; fears of pollution spreading in Punjab) सतलुज नदी पर स्थित रोपड़ हेडवर्क्स में लंबे समय से जमा भारी मात्रा में कचरा और प्रदूषक पदार्थ डाउनस्ट्रीम यानी नदी के बहाव की दिशा में छोड़ दिए गए। इसके बाद स्थानीय लोगों और राजनीतिक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस घटनाक्रम ने पंजाब की जल प्रणाली में प्रदूषण के प्रवेश को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रोपड़ हेडवर्क्स के कार्यकारी अभियंता दमनदीप सिंह ने पुष्टि की कि हेडवर्क्स में जमा कचरा डाउनस्ट्रीम छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि रोपड़ हेडवर्क्स में पानी को लंबे समय तक रोककर रखना संभव नहीं है, इसलिए इसे डाउनस्ट्रीम छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने इस मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नदी के जरिए जहरीले प्रदूषकों को पूरे पंजाब में फैलने दिया, जबकि इन्हें पहले हटाया जाना चाहिए था।
चीमा ने कहा कि हेडवर्क्स से कचरा निकालकर उसकी वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए थी, ताकि प्रदूषण के स्रोत और उसकी प्रकृति का पता लगाया जा सके। हालांकि, डॉ चीमा ने सिरसा और सतलुज नदियों में कथित प्रदूषण को लेकर अज्ञात औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ रोपड़ विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा एफआईआर दर्ज कराने का स्वागत भी किया है। उन्होंने कहा कि अगर रोपड़ हेडवर्क्स में जमा कचरे को भी हटाकर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से उसकी जांच कराई जाती तो कार्रवाई अधिक विश्वसनीय होती।
रविवार को सिटी रोपड़ थाने में सतलुज नदी में कथित तौर पर रासायनिक औद्योगिक कचरा बहाने और डंप करने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा ने दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बद्दी-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से सिरसा नदी में पहुंच रहा प्रदूषण आगे चलकर सतलुज नदी तक पहुंच रहा है।
एफआईआर बद्दी- नालागढ़ क्षेत्र की अज्ञात औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 270, 271, 279 और 280 के अलावा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 और 43 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 7 के तहत दर्ज की गई है। एफआईआर के मुताबिक, कथित प्रदूषण से रोपड़ शहर में पेयजल आपूर्ति, जलीय जीवों और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरा पैदा हो सकता है। इस विवाद ने सिरसा नदी में प्रदूषण की स्थिति पर भी दोबारा ध्यान खींचा है।
हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों में बद्दी औद्योगिक क्षेत्र के नीचे नदी के कुछ हिस्सों में दवाइयों से जुड़े रासायनिक यौगिकों और भारी धातुओं की मौजूदगी सामने आई है। 2024 के एक अध्ययन में एंटीबायोटिक्स समेत कई फार्मास्यूटिकल यौगिक पाए गए थे, जिनकी मात्रा ने पर्यावरणीय जोखिम और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को लेकर चिंता बढ़ाई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि हिमाचल से प्रदूषित पानी के पंजाब में प्रवेश करने के स्थान पर औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी कितनी प्रभावी है और इसके बाद यह प्रदूषण राज्य की नदियों व नहरों के नेटवर्क में किस तरह फैल रहा है। रोपड़ हेडवर्क्स से ही सतलुज का पानी सिरहिंद नहर के जरिए मालवा क्षेत्र की ओर जाता है। ऐसे में हेडवर्क्स से छोड़े जाने वाले पानी की गुणवत्ता पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रशासन कचरे के वास्तविक स्रोत का पता लगाए, डाउनस्ट्रीम छोड़ी गई सामग्री की वैज्ञानिक जांच कराए और नदी तंत्र को प्रदूषित करने वाली जिम्मेदार औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।



















