नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Ban on sale of Everest Asafoetida; irregularities found in 3 other spices as well) फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने एवेरेस्ट हींग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। जांच में प्रोडक्ट को मिसब्रांडेड और सबस्टैंडर्ड पाए जाने के बाद इसकी बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता।
इसके अलावा लालजी गोढू हींग की बिक्री पर भी फिलहाल रोक लगाई गई है और संबंधित कंपनी को चेतावनी जारी की गई है।
एवेरेस्ट के 3 मसालों में भी नियमों की अनदेखी
FSSAI की जांच में एवेरेस्ट के एग करी मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाला में भी निर्धारित नियमों के अनुपालन में कमी पाई गई। हालांकि, इन तीनों उत्पादों पर बिक्री प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
मिसब्रांडेड और सबस्टैंडर्ड का क्या मतलब?
मिसब्रांडेड फूड का मतलब ऐसे खाद्य उत्पाद से है, जिसकी पैकेजिंग या लेबल पर दी गई जानकारी गलत, अधूरी या भ्रामक हो अथवा निर्धारित लेबलिंग नियमों का पालन न करती हो।
वहीं, सबस्टैंडर्ड फूड वह उत्पाद है जो निर्धारित न्यूनतम गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता। हालांकि, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि वह सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित हो।
पैकेट पर लाल निशान लगाने का प्रस्ताव
इसी बीच पैकेज्ड फूड को लेकर FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ज्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट वाले उत्पादों के पैकेट के सामने लाल रंग का हेक्सागोनल चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य ग्राहकों को पैकेट खरीदते समय ही यह समझने में मदद करना है कि किसी उत्पाद में स्वास्थ्य के लिए चिंता वाले पोषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक हैं।
फूड इंडस्ट्री ने प्रस्ताव पर जताई चिंता
प्रस्तावित सख्त लेबलिंग व्यवस्था को लेकर फूड इंडस्ट्री की ओर से भी आपत्तियां सामने आई हैं। कोका-कोला, नेस्ले और पेप्सीको का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग समूहों ने प्रस्ताव के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है।
वहीं, महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने खाद्य कारोबारियों से केवल सरकारी नियमों का पालन करने तक सीमित न रहने और उपभोक्ताओं के प्रति ज्यादा जिम्मेदारी बरतने की अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई प्रक्रिया
फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI और सरकार से देरी पर सवाल उठाए थे। इसके बाद FSSAI ने पैकेज्ड फूड पर लाल चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव अदालत के समक्ष रखा है।
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट की अधिक मात्रा की आसान पहचान मिल सकेगी।


















