हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांव माजरा में प्रदूषण और कचरा प्लांट के खिलाफ मंगलवार को नालागढ़ में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान ‘प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए और एक बड़ा रोष मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि औद्योगिक कचरे और कचरा प्लांट के कारण क्षेत्र का पर्यावरण लगातार प्रभावित हो रहा है।
तीनों राज्यों के लोगों ने जताया रोष
प्रदर्शन में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण का असर केवल माजरा गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है।
गुरु रविदास गुरुद्वारा साहिब में आयोजित महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक गांव की नहीं, बल्कि तीन राज्यों के लोगों के साझा हितों और पर्यावरण की लड़ाई है।
पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, अमितोज सिंह मानऔर खुशनविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि औद्योगिक कचरे और कचरा प्लांट के कारण भूजल और नदियां प्रदूषित हो रही हैं। उनका दावा है कि इसका असर रूपनगर के हेडवर्क्स तक भी पहुंच रहा है, जिससे पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।
प्रशासन को दिया अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने पहले एसडीएम के मौके पर नहीं पहुंचने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद एसडीएम मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया।
प्रशासन की ओर से 5 सितंबर को डीसी सोलन के साथ संघर्ष समिति की बैठक तय की गई है। प्रदर्शनकारियों और नेताओं ने स्पष्ट किया है कि इस बैठक में यदि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कई नेताओं ने दिया आंदोलन को समर्थन
महापंचायत में हिमाचल प्रदेश के पूर्व विधायक लखविंदर सिंह राणा और केएल ठाकुर समेत कई नेताओं ने भी आंदोलन का समर्थन किया। नेताओं ने प्रदूषण से प्रभावित लोगों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और संबंधित विभागों से प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल सभी की नजरें 5 सितंबर को होने वाली डीसी सोलन और संघर्ष समिति की बैठक पर टिकी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक प्रदूषण और कचरा प्लांट से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।















