लुधियाना। राजवीर दीक्षित
(Electricity crisis deepens in Punjab, 6 thermal units closed; Demand crosses 15,500 MW) पंजाब में बिजली की बढ़ती मांग और थर्मल प्लांटों में उत्पादन प्रभावित होने के कारण बिजली संकट गहराता जा रहा है। राज्य में पिछले कुछ दिनों से बिजली की मांग 15,500 मेगावाट के पार बनी हुई है। मांग और उत्पादन के बीच बढ़ते अंतर को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को केंद्रीय पूल से बिजली खरीदनी पड़ रही है।
स्थिति यह है कि पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांटों की 6 यूनिटों में उत्पादन बंद है। वहीं, चालू यूनिटों में भी पूरी क्षमता के मुताबिक बिजली नहीं बन रही। दूसरी ओर, निजी थर्मल प्लांटों की पांचों यूनिटों से उत्पादन जारी है।
केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी
बिजली की कमी को पूरा करने के लिए PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 10,700 मेगावाट बिजली खरीद रहा है। निजी थर्मल प्लांटों से करीब 2,750 मेगावाट बिजली मिल रही है, जबकि पंजाब में सभी स्रोतों को मिलाकर लगभग 4,730 मेगावाट तक उत्पादन हो रहा है।
इसके बावजूद औद्योगिक इलाकों में बिजली कटौती का असर साफ दिखाई दे रहा है। लुधियाना, खन्ना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे क्षेत्रों में करीब साढ़े चार घंटे तक कटौती की सूचना है।
धान की सिंचाई से बढ़ी बिजली की मांग
बिजली संकट के पीछे एक बड़ा कारण पंजाब में धान की सिंचाई का सीजन भी माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान ट्यूबवेल और मोटर चलाकर खेतों में पानी लगा रहे हैं। इससे कृषि क्षेत्र की बिजली मांग बढ़ गई है।
इसके साथ ही बारिश की कमी के कारण तापमान और उमस बढ़ने से घरेलू बिजली की खपत भी बढ़ी है। बढ़ी हुई मांग के बीच पर्याप्त सप्लाई नहीं मिलने से कई इलाकों में अघोषित कटौती की स्थिति बन रही है।
इंडस्ट्री पर रात में 5 घंटे तक कट
बिजली की कमी का सीधा असर अब उद्योगों पर भी पड़ रहा है। PSPCL की ओर से Category-II इंडस्ट्री पर रात 7 बजे से 12 बजे तक करीब 5 घंटे की कटौती की जा रही है।
औद्योगिक इकाइयों का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर नाइट शिफ्ट पर पड़ रहा है। शाम को शिफ्ट शुरू होने के समय ही बिजली बंद हो जाती है और आधी रात के बाद सप्लाई बहाल होने पर कर्मचारियों के वापस काम पर आने में परेशानी होती है।
तकनीकी खराबियों से भी उत्पादन प्रभावित
पंजाब में रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो में सरकारी थर्मल प्लांट हैं। रोपड़ और लहरा मोहब्बत में चार-चार यूनिट हैं, जबकि तलवंडी साबो में दो यूनिट हैं।
सरकारी थर्मल प्लांटों की कुल क्षमता करीब 2,300 मेगावाट है, लेकिन फिलहाल इनसे लगभग 767 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है। लहरा मोहब्बत की एक यूनिट में आग लगने से उपकरण क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिसके कारण उत्पादन प्रभावित है। इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल से भी कामकाज पर असर पड़ा है।
जानकारी के मुताबिक, 10 सितंबर तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रिड बचाने के लिए बढ़ाई गई कटौती
बिजली संकट के चलते अब केवल घरेलू और Category-I फीडरों तक ही कटौती सीमित नहीं है। बिजली की कमी को देखते हुए Category-II और Category-III औद्योगिक फीडरों पर भी कट लगाए जा रहे हैं।
PSPCL के अनुसार, बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करने का उद्देश्य ग्रिड को सुरक्षित रखना और किसी बड़े सिस्टम फेलियर की स्थिति से बचना है। फिलहाल बढ़ी मांग, कम उत्पादन और थर्मल यूनिटों की तकनीकी समस्याओं के बीच पंजाब में बिजली संकट से राहत के लिए वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई जुटाने की कोशिश जारी है।



















