शिमला । राजवीर दीक्षित
(Political row over lottery in the Assembly; Jairam calls CM’s statement a big joke)हिमाचल में लॉटरी शुरू करने के फैसले पर विवाद बढ़ गया है। बुधवार को भाजपा विधायकों ने विधानसभा के बाहर धरना देकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। जयराम ठाकुर ने कहा कि लॉटरी का असर खासकर युवा पीढ़ी पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार को फैसला वापस लेने की चेतावनी देते हुए कहा कि देवभूमि की पहचान को ऐसी प्रवृत्तियों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
लॉटरी को लेकर जयराम ठाकुर का सरकार पर निशाना
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि लॉटरी से किसी को इसकी आदत नहीं लगेगी और यह महज भाग्य का खेल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पहले ही नशे जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है और चिट्टा गांव-गांव तक पहुंच चुका है। ऐसे में लॉटरी शुरू करना लोगों के बीच एक नई लत को बढ़ावा देने वाला कदम साबित हो सकता है।
लॉटरी के जाल ने उजाड़े कई घर, कर्ज में डूबे लोग
उन्होंने कहा कि अतीत में लॉटरी की लत ने कई परिवारों को आर्थिक संकट में धकेल दिया था। हालात इतने बिगड़े कि लोगों को अपना घर और जमीन तक बेचनी पड़ी। भारी कर्ज के बोझ तले कुछ लोगों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 के बाद प्रदेश इस समस्या से काफी हद तक बाहर निकल पाया था, लेकिन अब दोबारा ऐसी स्थिति पैदा होने का खतरा चिंता बढ़ा रहा है।
समिति की रिपोर्ट में सिफारिश नहीं, फिर भांग की खेती क्यों?
जयराम ठाकुर ने भांग की खेती को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने समिति को अध्ययन और दौरे के लिए भेजा था, लेकिन समिति ने अपनी रिपोर्ट में भांग की खेती को वैध करने की सिफारिश नहीं की। ऐसे में सरकार के प्रस्ताव का आधार क्या है, यह स्पष्ट होना चाहिए। ठाकुर ने सदन में सरकार से इस पर विस्तृत जानकारी देने की मांग की।
रोजगार का वादा बना सवाल, युवाओं की उम्मीदें अब भी अधूरी
नेता प्रतिपक्ष ने बेरोजगारी को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने युवाओं को रोजगार देने का बड़ा वादा किया था। पहली कैबिनेट में एक लाख नौकरियां और पांच साल में पांच लाख रोजगार देने की बात कही गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर युवाओं को अभी भी रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर भर्ती प्रक्रिया तेज करनी चाहिए, ताकि युवाओं को उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा मिल सके।
18 हजार कर्मचारी कहां गए? सरकारी तंत्र में कमी को लेकर भाजपा ने सरकार को घेरा
भाजपा ने सरकारी कर्मचारियों की घटती संख्या को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। नेताओं ने दावा किया कि भाजपा सरकार के समय करीब 1.90 लाख सरकारी कर्मचारी थे, जबकि मौजूदा समय में यह संख्या घटकर 1.72 लाख रह गई है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर कर्मचारी और पेंशनर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। एचआरटीसी और एचपीटीडीसी के कर्मचारी भी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। भाजपा ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़े इन तमाम मुद्दों को विधानसभा में उठाकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जाएगी।



















