Home Delhi SC का बड़ा फैसला, जंतर-मंतर की 13 FIR रद्द

SC का बड़ा फैसला, जंतर-मंतर की 13 FIR रद्द

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित

(Major SC ruling: 13 FIRs related to Jantar Mantar quashed) जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मंगलवार को प्रदर्शन से संबंधित सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया।

हालांकि, सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोग भी मौके पर पहुंचे थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि इनमें से किसी व्यक्ति पर प्रदर्शन के दौरान मारपीट या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं, तो उन मामलों में कार्रवाई जारी रह सकती है।

5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद CJP नेताओं से किए गए तीनों वादों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

SC ने कहा- फैसला सिर्फ इसी मामले तक सीमित

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि FIR रद्द करने का फैसला मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इसे दूसरे मामलों के लिए मिसाल या बाध्यकारी फैसला नहीं माना जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल इस शर्त पर किया जा रहा है कि दोनों पक्ष अदालत के सामने हुए समझौते का पूरी तरह पालन करेंगे।

दिल्ली पुलिस ने FIR आगे नहीं बढ़ाने की बात कही थी

सरकार ने 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि 25 जुलाई के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR को आगे नहीं चलाना चाहती।

अंतरिम आवेदन उस स्थिति में दाखिल किया जाता है, जब किसी मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान तत्काल या अस्थायी राहत की मांग करनी हो।

20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई थी झड़प

20 जुलाई को दिल्ली में CJP के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

इसके बाद आंदोलन का असर कई शहरों तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था।

आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। सरकार की ओर से CJP की दूसरी मांगें स्वीकार किए जाने और प्रधान के इस्तीफे की मांग के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।

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