चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Former CM Beant Singh’s assassin Rajoana to be admitted to hospital following High Court orders!) पटियाला सेंट्रल जेल में 30 साल से अधिक समय से बंद बलवंत सिंह राजोआणा को आंखों के इलाज के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उन्हें आंखों का ऑपरेशन कराने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि वह पीजीआई चंडीगढ़ में दोनों आंखों का ऑपरेशन करा सकते हैं।
राजोआणा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आंखों में मोतियाबिंद के इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि पटियाला जेल के अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
दोनों आंखों में मोतियाबिंद की शिकायत
याचिका के अनुसार, राजोआणा की दोनों आंखों में मोतियाबिंद है और उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। उन्होंने इलाज का पूरा खर्च खुद उठाने की बात कही थी।
इससे पहले जनवरी 2026 में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच पीजीआई चंडीगढ़ ले जाकर आंखों की जांच कराई गई थी। डॉक्टरों ने उस समय चश्मे की मदद से उनकी दृष्टि पर्याप्त होने की स्थिति में ऑपरेशन कुछ समय टालने की सलाह दी थी।
जेल अस्पताल ने भी ली विशेषज्ञों की राय
इसके बाद पटियाला सेंट्रल जेल के अस्पताल की ओर से डॉ. आरएस रंधावा आई अस्पताल से भी चिकित्सकीय सलाह ली गई। विशेषज्ञों की राय में मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद राजोआणा को पावर वाला चश्मा लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
राजोआणा ने अदालत को बताया कि पटियाला में जिस अस्पताल में ऑपरेशन कराने की मांग की गई थी, वह जेल से करीब दो किलोमीटर दूर है। हालांकि हाईकोर्ट ने अब पीजीआई चंडीगढ़ में ऑपरेशन कराने की अनुमति दी है।
बेअंत सिंह हत्याकांड में मिली थी मौत की सजा
राजोआणा पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी हैं। मामले में चंडीगढ़ की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 31 जुलाई 2007 को उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
याचिका के मुताबिक, राजोआणा 27 जनवरी 1996 से हिरासत में हैं और अब तक 30 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।
रिहाई का फैसला भी रहा है लंबित
राजोआणा की याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने आठ कैदियों की रिहाई का फैसला किया था, जिसमें उनका नाम भी शामिल था। हालांकि, यह फैसला उनके मामले में अब तक लागू नहीं हो पाया है।
फिलहाल हाईकोर्ट की अनुमति के बाद उनकी आंखों के इलाज का रास्ता साफ हो गया है। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं संबंधित अधिकारियों की निगरानी में पूरी की जाएंगी।



















