अयोध्या। टारगेट न्यूज नेटवर्क
(Major change in Ram Mandir Trust: Former Air Marshal Jitendra Mishra to be the first CEO) अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया। पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्ष सेवाएं दे चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर चुके हैं।
ट्रस्ट की बैठक में इसके अलावा कई अहम नियुक्तियां की गईं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नए ट्रस्टी बनाए गए दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।
ट्रस्ट में 3 नए सदस्य, पहली महिला ट्रस्टी भी
ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।
निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी। वह फिरोजाबाद के महात्मा गांधी महाविद्यालय में प्राचार्य के पद पर सेवाएं दे चुकी हैं और 2021 में सेवानिवृत्त हुई थीं।
चंपत राय की जगह गोविंद देव गिरि को जिम्मेदारी
मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के प्रशासन में बदलाव की प्रक्रिया तेज हुई थी। इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 2 जुलाई को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया था।
इसके बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था। वह करीब 58 दिनों तक इस पद पर रहे। अब गोविंद देव गिरि को स्थायी महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
जीतेंद्र मिश्रा पर क्यों जताया भरोसा?
जीतेंद्र मिश्रा के चयन के पीछे उनकी लंबी सैन्य सेवा और प्रशासनिक अनुभव को अहम माना जा रहा है। वह वायुसेना में करीब चार दशक तक विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका भी चर्चा में रही। उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया है।
मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और बड़े स्तर के प्रशासनिक कामकाज को देखते हुए उनका सैन्य अनुभव ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया से ताल्लुक रखते हैं।
नए ट्रस्टियों की भी अहम पृष्ठभूमि
मदन मोहन पांडेय: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामले से जुड़े कानूनी पक्ष में उनकी भूमिका रही।
महेश भागचंदका: दिल्ली के कारोबारी हैं और अशोक सिंघल फाउंडेशन से जुड़े रहे हैं। वह विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार बताए जाते हैं। राम मंदिर के भूमि पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी उनकी भूमिका रही।
निर्मला यादव: मूल रूप से एटा की रहने वाली हैं। वह महात्मा गांधी महाविद्यालय, फिरोजाबाद की प्राचार्य रह चुकी हैं। 2021 में सेवानिवृत्त हुईं।
मंदिर ट्रस्ट के पास 32 किलो सोना और 1518 किलो चांदी
राम मंदिर निर्माण के बाद से ट्रस्ट को चढ़ावे में बड़ी मात्रा में कीमती धातुएं भी मिली हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मंदिर को अब तक करीब 32 किलो सोना और 1518 किलो चांदी प्राप्त हुई है।
चांदी को गलवाकर 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की ईंटों में बदलकर सुरक्षित रखा गया है।
ट्रस्ट के खातों में ₹1876 करोड़
ट्रस्ट के बैंक खातों में करीब ₹1876 करोड़ जमा होने की जानकारी दी गई है। ट्रस्ट के खाते SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक में हैं।
मंदिर निर्माण के दौरान समर्पण निधि के रूप में करीब ₹3264 करोड़ प्राप्त हुए थे, जबकि चढ़ावे से ₹582 करोड़ मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें से करीब ₹2370 करोड़ मंदिर निर्माण और ₹391 करोड़ प्रबंधन से जुड़े कार्यों पर खर्च किए जाने का विवरण सामने आया है।
राम मंदिर ट्रस्ट में हुए इन बदलावों को मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक दायरे और भविष्य की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



















