Home Haryana वनकर्मी की मिलीभगत से खैर के 34 पेड़ काटे

वनकर्मी की मिलीभगत से खैर के 34 पेड़ काटे

पंचकूला। राजवीर दीक्षित

(34 Khair trees felled in collusion with forest personnel) मोरनी-पिंजौर वन रेंज में रात के अंधेरे में बेशकीमती खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए जंगल से 34 कटे हुए खैर के पेड़ बरामद किए हैं। आरोप है कि वन विभाग के एक वॉचमैन की मिलीभगत से तस्करों द्वारा पेड़ों की कटाई की जा रही थी।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी। टीम को देखकर तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर कार से फरार हो गए। इसके बाद अधिकारियों ने जंगल के भीतर सर्च अभियान चलाया। सड़क से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर 26 खैर के पेड़ कटे हुए मिले, जबकि जंगल के दूसरे हिस्से में 8 और पेड़ों की कटाई मिली।

तस्करों ने पेड़ों को काटने के बाद उनके लट्ठे भी तैयार कर रखे थे। इनमें से कुछ लट्ठों को सड़क के नजदीक तक लाया जा चुका था। वन विभाग की टीम ने मौके से कटे हुए पेड़ों और तैयार लट्ठों को कब्जे में ले लिया।

13 तस्करों पर FIR, 8 नामजद

मामले में पुलिस ने 8 नामजद समेत कुल 13 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। वन विभाग की ओर से तस्करों और अवैध कटान में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश भी जारी है।

पहले भी सामने आ चुकी है वनकर्मियों की मिलीभगत

पंचकूला के संरक्षित वन क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का यह पहला मामला नहीं है। करीब छह महीने पहले आसरेवाली संरक्षित वन क्षेत्र में भी रात के समय बड़ी संख्या में खैर के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था।

जांच के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत भी सामने आई थी। मामले की जांच के लिए गठित SIT अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें वन विभाग के कर्मचारी और तस्कर शामिल हैं।

उस मामले के बाद वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने वाइल्ड लाइफ DFO राजेंद्र प्रसाद डांगी, टेरिटोरियल DFO विशाल कौशिक और वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह को निलंबित किया था। इससे पहले वन दरोगा रघुविंद्र सिंह को भी सस्पेंड किया गया था और SIT ने उन्हें गिरफ्तार किया था।

स्टाफ की कमी भी बड़ी चुनौती

वन विभाग के वाइल्ड लाइफ विंग में स्टाफ की कमी भी लगातार चुनौती बनी हुई है। विभाग के अनुसार एक DFO के पास कई जिलों का जिम्मा है। सीमित अधिकारियों और कर्मचारियों को सेंचुरी, नेशनल पार्क और बड़े संरक्षित वन क्षेत्र की निगरानी करनी पड़ती है।

वहीं, विभाग के सामान्य वन क्षेत्र में अपेक्षाकृत ज्यादा स्टाफ तैनात है। ऐसे में वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।

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