सोलन । राजवीर दीक्षित
(Major action against Kala Amb pharmaceutical company; orders issued to halt production) काला अंब की M/s Welcure Remedies पर ड्रग विभाग का बड़ा एक्शन हुआ है। राज्य और केंद्रीय अधिकारियों की संयुक्त जांच में दवा निर्माण से जुड़ी कई गंभीर और लगातार सामने आ रही कमियां पकड़ी गईं। इसके बाद राज्य ड्रग अधिकारियों ने कंपनी में सभी तरह के प्रोडक्शन पर तत्काल रोक लगा दी।
जांच में सामने आई खामियों को नियामकीय मानकों के लिहाज से गंभीर माना गया है। कार्रवाई के बाद कंपनी में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है।
जून में एक्सपोर्ट के लिए भेजे गए सामान की जांच ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दीं। जांच में कंपनी का बनाया कार्डियक इमरजेंसी इंजेक्शन नकली निकल गया। सरकारी जांच रिपोर्ट में बैच नंबर WADG25002A वाले एडेनोसिन इंजेक्शन के सैंपल को नकली घोषित किया गया। मुंबई की सेंट्रल ड्रग्स टेस्टिंग लैबोरेटरी के सरकारी एनालिस्ट की रिपोर्ट के बाद यह जानकारी DCGI तक पहुंची। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नकली इंजेक्शन कंपनी के नाम और बैच नंबर के साथ एक्सपोर्ट की खेप तक कैसे पहुंचा?
अधिकारियों के मुताबिक, मुंबई की एक कंपनी के जरिए बेचे जा रहे इस इंजेक्शन को केवल घरेलू इस्तेमाल और वितरण के लिए मंजूरी दी गई थी। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर इसे विदेश भेज दिया गया। अफ्रीकी देश में पहुंचने के बाद प्रोडक्ट को नकली घोषित कर दिया गया। इस मामले ने न सिर्फ भारतीय फार्मा सेक्टर की साख पर सवाल खड़े किए, बल्कि दवाओं के निर्यात और नियामकीय निगरानी को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दीं।
उल्लंघन सामने आने के बाद DCGI ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बद्दी में तैनात CDSCO अधिकारियों को राज्य ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर विस्तृत जांच के निर्देश दिए। जून में हुई शुरुआती जांच में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में कई गंभीर खामियां सामने आईं। इसके बाद अधिकारियों ने पहले कंपनी का प्रोडक्शन रुकवाया और जांच आगे बढ़ने पर उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया। अब कंपनी ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 18(c) के तहत किसी भी दवा का निर्माण, बिक्री या वितरण नहीं कर सकती।
अपील के बाद कंपनी को फिलहाल प्रोडक्शन जारी रखने की राहत जरूर मिल गई, लेकिन अगस्त की दोबारा हुई जांच ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दीं। जॉइंट इंस्पेक्शन में सामने आई कमियों को ठीक करने के लिए कंपनी ने समय मांगा। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। केवल कंपनी के आश्वासन के आधार पर उत्पादन की अनुमति देना संभव नहीं है। जांच अधिकारियों ने कंपनी के मौजूदा क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को भी नाकाफी और अप्रभावी करार दिया।
जून में माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग और एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग को लेकर सामने आई गंभीर कमियों को कंपनी तय समय में दूर नहीं कर पाई। लापरवाही को देखते हुए काला अंब के असिस्टेंट लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने 8 सितंबर को प्रोडक्शन रोकने का नया आदेश जारी कर दिया।
हेल्थ सेक्रेटरी आशीष सिंघमार के मुताबिक, काला अंब स्थित M/s वेलक्योर रेमेडीज़ ने कमियों को सुधारने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। लेकिन मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो, इसलिए कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक सभी कमियों का संतोषजनक समाधान नहीं होता और रेगुलेटर्स की संयुक्त जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उत्पादन शुरू नहीं किया जाएगा।
यानी नियामकों ने साफ कर दिया है—पहले सुरक्षा मानकों की पूरी जांच, उसके बाद ही प्रोडक्शन की अनुमति।



















