टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश भर में सक्रिय मानसून को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी की प्रक्रिया इस सप्ताहांत से शुरू हो सकती है। सामान्य तौर पर मानसून की विदाई की प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू होती है, लेकिन इस बार कुछ देरी के बाद अब स्थितियां अनुकूल बनती दिख रही हैं।
मानसून वापसी के संकेत
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में हवाओं का रुख बदलने और नमी में कमी आने के कारण मानसून की विदाई की परिस्थितियां बन रही हैं। आमतौर पर मानसून की वापसी की शुरुआत शुष्क मौसम और हवाओं की दिशा में बदलाव से होती है। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों में कमी दर्ज की जाएगी।
IMD के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘मानसून की वापसी के लिए आवश्यक परिस्थितियां अब धीरे-धीरे विकसित हो रही हैं। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से मानसून के लौटने की संभावना है।’
प्रमुख बिंदु:
- उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी।
- राजस्थान के पश्चिमी इलाकों से मानसून की वापसी की शुरुआत होगी।
- सामान्य समय सीमा के मुकाबले इस बार मानसून की विदाई में मामूली देरी देखी गई है।
- देश के अन्य हिस्सों में अभी भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है।
किसानों और आम जनजीवन पर असर
मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि बारिश पूरी तरह थम जाएगी। देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में अभी भी मानसून की सक्रियता बनी रह सकती है। हालांकि, उत्तर भारत में मानसून की वापसी के साथ ही तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे लोगों को उमस का सामना करना पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की विदाई का समय खरीफ फसलों की कटाई के लिए महत्वपूर्ण होता है।



















