टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अंसारी ने जवाहरलाल नेहरू के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि भारत के लिए असली खतरा साम्यवाद (कम्युनिज्म) से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से है। इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंसारी पर निशाना साधा है।
नेहरू के विचारों का संदर्भ
हामिद अंसारी ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक दृष्टिकोण का सहारा लिया। उन्होंने तर्क दिया कि नेहरू ने हमेशा धर्मनिरपेक्षता को भारतीय लोकतंत्र की नींव माना था और वे सांप्रदायिक विचारधाराओं को देश की एकता के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानते थे।
अंसारी ने कहा, ‘नेहरू का मानना था कि भारत की विविधता ही उसकी शक्ति है। आज के दौर में दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता जिस तरह से सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रही है, वह चिंताजनक है।’
भाजपा का तीखा पलटवार
भाजपा ने इस बयान को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि अंसारी का बयान न केवल तथ्यों से परे है, बल्कि यह देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं को आहत करने वाला है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
- भाजपा ने अंसारी के बयान को ‘भारत विरोधी’ नैरेटिव का हिस्सा बताया।
- विपक्ष ने इस मुद्दे पर सावधानी बरतते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है।
- सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में वैचारिक ध्रुवीकरण अपने चरम पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में चुनावी विमर्श को और अधिक तीखा बना सकते हैं।



















