टारगेट न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट: कनाडा में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने एक बड़े और खतरनाक जबरन वसूली नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए भारतीय मूल के पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह आपराधिक गिरोह ब्रिटिश कोलंबिया में एक प्रमुख ऑटो डीलरशिप को लगातार निशाना बना रहा था और इसके तहत गोलीबारी और आगजनी जैसी गंभीर वारदातों को अंजाम दिया गया था। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने कनाडा और भारत दोनों देशों में रह रहे प्रवासी समुदाय के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इस तरह के संगठित अपराधों में अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आरसीएमपी के विशेष जांच दल द्वारा इस पूरी कार्रवाई को ‘प्रोजेक्ट ई-पर्सुएंस’ (Project E_PURSUANCE) नाम दिया गया था, जिसके तहत महीनों की कड़ी मेहनत और तकनीकी सर्विलांस के बाद आखिरकार अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाया गया। पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपी गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं, जिनमें जबरन वसूली के अलावा हथियारों की तस्करी और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार भी शामिल है।
ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)
- कनाडा में ऑटो डीलरशिप को निशाना बनाकर जबरन वसूली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश।
- आरसीएमपी द्वारा ‘प्रोजेक्ट ई-पर्सुएंस’ के तहत की गई संयुक्त कार्रवाई में पांच भारतीय मूल के लोग गिरफ्तार।
- गिरफ्तार आरोपियों में संकेत सिंगला, साहिल, सिमरनजीत सिंह, हर्ष और जगदीप सिंह शामिल हैं।
- सरे, लैंगले, ओटावा और टोरंटो में समन्वित छापेमारी के दौरान हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स बरामद।
- कनाडा सीमा सेवा एजेंसी (CBSA) और अंतरराष्ट्रीय पुलिस समन्वय के जरिए भारत से लौटे मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)
इस पूरे मामले की शुरुआत जून 2025 में हुई थी, जब ब्रिटिश कोलंबिया में स्थित एक ऑटो डीलरशिप के सह-मालिकों ने पुलिस से संपर्क किया और उन्हें भारी-भरकम फिरौती मांगने के लिए मिल रही धमकियों की जानकारी दी। जब पीड़ित कारोबारियों ने इन अवैध मांगों के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो अज्ञात हमलावरों ने उनके सरे और लैंगले स्थित शोरूम तथा ठिकानों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया। इन हमलों से कनाडाई व्यापारिक जगत और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद आरसीएमपी ने लैंगले के नेतृत्व में एक विशेष संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया। गहन तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी जुटाने के बाद, 1 अक्टूबर को ब्रिटिश कोलंबिया अभियोजन सेवा ने पांचों आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए। इस जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपियों में से एक, 23 वर्षीय संकेत सिंगला, इस पूरी साजिश के दौरान भारत में मौजूद था। कनाडाई जांच अधिकारियों ने आव्रजन और सीमा नियंत्रण एजेंसियों के साथ मिलकर एक अत्यंत सुनियोजित और नियंत्रित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया, जिसके तहत सिंगला को कनाडा लौटने के लिए प्रेरित किया गया और 1 अक्टूबर को टोरंटो पियरसन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही उसे दबोच लिया गया। इसके साथ ही, अन्य चार आरोपियों को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर से विभिन्न छापों के दौरान गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान चार अवैध हथियार, भारी मात्रा में गोला-बारूद, मैगजीन के साथ-साथ फेंटेनाइल, कोकीन और अफीम जैसे खतरनाक प्रतिबंधित ड्रग्स भी बरामद किए हैं, जो इस बात की तस्दीक करते हैं कि यह गिरोह केवल जबरन वसूली तक सीमित नहीं था, बल्कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट चला रहा था।
प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)
कनाडा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस सफलता को संगठित अपराध के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत करार दिया है। लैंगले आरसीएमपी के अधिकारी-इन-चार्ज, सुपरिंटेंडेंट हरम दोसांज ने उन साहसी पीड़ितों की सराहना की जिन्होंने आगे आकर पुलिस को इस रंगदारी रैकेट के बारे में खुलकर जानकारी दी और जांच में पूरा सहयोग किया। वहीं, चीफ सुपरिंटेंडेंट डंकन पाउंड ने विभिन्न स्थानीय, प्रांतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।
हम उन सभी पीड़ितों के आभारी हैं जिन्होंने समय पर आगे आकर पुलिस से संपर्क किया। इस प्रकार के संगठित अपराधों से निपटने के लिए समुदाय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का आपसी सहयोग सबसे बड़ा हथियार है। – सुपरिंटेंडेंट हरम दोसांज
स्थानीय समुदाय और व्यापारिक संगठनों ने भी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है, हालांकि वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस तरह की वारदातों से कनाडा में रह रहे दक्षिण एशियाई मूल के कारोबारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
आगे क्या? (What Lies Ahead)
फिलहाल गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उन्हें जल्द ही कनाडाई अदालतों में पेश किया जाएगा, जहां उनके खिलाफ सुनवाई आगे बढ़ेगी। आरसीएमपी और प्रांतीय टास्क फोर्स के अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी खत्म नहीं हुई है। पुलिस ब्रिटिश कोलंबिया और अल्बर्टा प्रांतों में हुई अन्य समान वारदातों में इन आरोपियों या उनके अन्य साथियों की संलिप्तता की गहन पड़ताल कर रही है। जैसे-जैसे डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट्स की कड़ियां जुड़ेंगी, इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है और आने वाले दिनों में और भी नई गिरफ्तारियां तथा अतिरिक्त आरोप तय किए जा सकते हैं। कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि विदेशी धरती से संचालित होने वाले इस तरह के अपराधों के नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाए।


















