चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(High Court tells Punjab government: ‘Enough is enough; no more hide-and-seek’) पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया डीए/डीआर के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार पर बेहद सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की प्रक्रिया को लेकर सरकार से सवाल किए और कहा कि फैसले को चुनौती देना सरकार का अधिकार है, लेकिन सोशल मीडिया पर ट्वीट के जरिए अदालत के आदेश को चुनौती देना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने कहा कि सरकार अपने लिए खुद कड़ी कार्रवाई की स्थिति पैदा कर रही है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि “बहुत हो चुका, अब और लुका-छिपी नहीं चल सकती।”
मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। कोर्ट ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा को भी व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
SC जाने पर रोक नहीं, लेकिन प्रक्रिया पूरी करो
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। बेंच ने सवाल उठाया कि सरकार की ओर से दाखिल SLP एक महीने से ज्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की आपत्तियों में अटकी हुई है और उन्हें दूर नहीं किया गया।
सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में एक और SLP दाखिल की गई है। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि रजिस्ट्री की आपत्तियां अब तक दूर क्यों नहीं की गईं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में कानूनी उपाय अपनाने की आड़ में मामले को सिर्फ टालने की कोशिश की जा रही है।
‘हम सरकार के खिलाफ नहीं, रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ’
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि वह किसी एक सरकार के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मामला उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों का है, जिन्होंने वर्षों तक सरकार के लिए काम किया और अब अपने बकाये का इंतजार कर रहे हैं।
कोर्ट ने एडवोकेट जनरल से भी सवाल किया कि सरकार अपने चीफ सेक्रेटरी को किस तरह की सलाह दे रही है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से पंजाब सरकार की SLP की स्थिति की जानकारी लेने का भी निर्देश दिया।
गलत तथ्य पेश करने पर भी कोर्ट नाराज
बेंच ने कहा कि यह असामान्य स्थिति है और राज्य सरकार किस हद तक अदालत के सामने तथ्यों को पेश कर सकती है, यह उसके सामने स्पष्ट है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह सरकार की मंशा को समझने की कोशिश करते-करते अपनी सीमा तक पहुंच चुकी है।
3 अगस्त के आदेश से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज करते हुए कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित DA/DR की किस्तें केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार जारी करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने 15 दिन के भीतर भुगतान करने को कहा था। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज लगाने का भी निर्देश दिया गया था।
सरकार ने SC में दी चुनौती
पंजाब सरकार ने 1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी। सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान कम समय में करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।
सरकार ने यह भी कहा कि पंजाब के 2021 के पे रूल्स में DA की कोई निश्चित केंद्रीय दर या फॉर्मूला अनिवार्य नहीं है और DA की दर तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
सरकार बोली—₹6 हजार करोड़ का भुगतान हो चुका
सरकार ने अदालत को बताया है कि लिक्विडेशन के तहत करीब 6,000 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि पेंशनरों और अन्य बकायों का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
वहीं कर्मचारी संगठनों का दावा है कि राज्य के बढ़े टैक्स राजस्व के आधार पर करीब 14,200 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जा सकता है।
50% DA का ऐलान, 8% बकाया देने का फैसला
कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बातचीत के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक में कर्मचारियों को 50 प्रतिशत DA देने पर सहमति बनी। साथ ही 8 प्रतिशत लंबित DA जारी करने का फैसला हुआ। इससे सरकार पर करीब 248 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की बात सामने आई।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर
DA विवाद में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब मंगलवार की सुनवाई अहम मानी जा रही है। चीफ सेक्रेटरी की व्यक्तिगत पेशी और सुप्रीम कोर्ट में लंबित SLP की स्थिति पर कोर्ट का अगला रुख तय करेगा कि पंजाब सरकार के लिए यह मामला और कितना गंभीर मोड़ लेता है।

















