नूरपुर । राजवीर दीक्षित
(Hunger strike in Nurpur called off after 7 days; SDM and hospital administration forced to provide written assurance) नूरपुर में 50 बिस्तरों वाले मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (MCH) को शुरू करने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन गुरुवार को समाप्त हो गया। NGO RB जनकल्याण फाउंडेशन के प्रमुख अकिल बख्शी ने स्थानीय प्रशासन और सिविल अस्पताल प्रबंधन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद सातवें दिन अपना अनशन खत्म कर दिया। उन्होंने 2 अक्टूबर को सिविल अस्पताल परिसर में अनशन शुरू किया था।
अकिल बख्शी की मुख्य मांग थी कि करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से तैयार MCH भवन को जल्द से जल्द चालू किया जाए। इसके साथ ही उनके NGO को अस्पताल की रोगी कल्याण समिति (RKS) में शामिल करने की मांग भी उठाई गई थी।
हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2022 में शुरू किए गए इस स्वास्थ्य केंद्र में पिछले करीब चार वर्षों से कोई कामकाज नहीं हो रहा है। राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के कुछ ही महीनों बाद अस्पताल के लिए खरीदा गया सामान और फर्नीचर ऊना भेज दिया गया था। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्वास्थ्य सुविधा का लंबे समय तक इस्तेमाल न होना स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
गुरुवार को नूरपुर के SDM अरुण शर्मा और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अनुपमा शर्मा ने मामले में हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने बख्शी को लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, MCH का संचालन तभी शुरू हो सकेगा, जब निर्माण और संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी BSNL भवन को स्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द करेगी। इसके अलावा नेशनल हेल्थ मिशन के माध्यम से आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था, स्टाफ की तैनाती और मेडिकल विशेषज्ञों की नियुक्ति भी जरूरी होगी। भवन में बिजली और पानी की आपूर्ति से संबंधित लंबित कार्य भी लगभग पूरा होने वाला है।
वहीं, NGO को रोगी कल्याण समिति में शामिल करने की मांग पर अस्पताल प्रशासन ने बख्शी को गवर्निंग बॉडी की बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल होने की अनुमति दी है। इसके जरिए वह स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए अपने सुझाव, शिकायतें और मांगें रख सकेंगे। प्रशासन ने यह भी बताया कि उन्हें समिति का नियमित सदस्य बनाने का मामला उच्च अधिकारियों के समक्ष पहले ही उठाया जा चुका है।
अनशन खत्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि MCH को वास्तव में कब शुरू किया जाएगा। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि लिखित आश्वासन के बाद इस स्वास्थ्य केंद्र को चालू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि माताओं और बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।


















