बिलासपुर । राजवीर दीक्षित
(JP Nadda’s major message to the Himachal government! Will it have to provide a share for the railway line?)हिमाचल प्रदेश में विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को प्रदेश में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल, जलविद्युत और स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
55 हजार करोड़ से अधिक के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट, हजारों करोड़ की रेललाइन और बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं—नड्डा की समीक्षा में विकास का बड़ा खाका सामने आया।
बैठक में चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। 1,540 करोड़ रुपये की इस परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन हिमाचल सरकार की 231 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी अब तक लंबित है। नड्डा ने प्रदेश सरकार से यह राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया।
बद्दी के उद्योगों को बेहतर रेल सुविधा देने की दिशा में अब राज्य की लंबित हिस्सेदारी अहम मुद्दा बन गई है।
दूसरी ओर, ऊना के बल्क ड्रग पार्क के त्वरित क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एम्स बिलासपुर, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर ऊना और आईजीएमसी शिमला की परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना भी समीक्षा के प्रमुख विषयों में शामिल रही। 15,624 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा और 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लाभ मिलने का अनुमान है। परियोजना के वित्तीय भार का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार उठाएगी।
सड़क नेटवर्क को लेकर भी कई बड़े लक्ष्य सामने रखे गए। कीरतपुर-मनाली फोरलेन के पंडोह-टकोली खंड को मार्च 2027 तक, सोलन-कैथलीघाट खंड को सितंबर 2027 तक और शिमला बाईपास को सितंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पठानकोट-मंडी और शिमला-मटौर मार्गों के लिए क्रमशः 2028-29 और 2029-30 की समयसीमा तय है।
भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेललाइन के भानुपल्ली-बिलासपुर खंड को दिसंबर 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चंबा-भरमौर मार्ग को मजबूत करने, शिमला-पिंजौर-नालागढ़ मार्ग के रुके कार्यों में तेजी लाने और जसूर फ्लाईओवर को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया।
विधायक रणधीर शर्मा ने जगातखाना और कलर में फुटब्रिज बनाने की मांग रखी, जिस पर आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
कुल मिलाकर, हिमाचल में विकास परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिए लक्ष्य तो तय किए जा रहे हैं, लेकिन अब असली परीक्षा समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा करने और लंबित मामलों को सुलझाने की होगी।


















