थरूर ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि दिल्ली में युद्ध जैसे हालात नजर आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की GenZ को अघोषित ‘Emer-GenZ’ से बेहतर व्यवस्था मिलनी चाहिए।
दिल्ली को किले में बदलने का आरोप
थरूर के मुताबिक, राजधानी में जगह-जगह चेकपॉइंट, कंक्रीट बैरिकेड और सड़क पर स्पाइक स्ट्रिप लगाए गए हैं। उन्होंने पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती, मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध और ट्रेनों के रद्द होने का भी जिक्र किया।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि प्रदर्शन से पहले कुछ युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिया गया। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं पर रोक की खबरों को भी दमनकारी कदम बताया।
‘जंतर-मंतर पर भी आवाज उठाना मुश्किल’
थरूर ने कहा कि जंतर-मंतर को नागरिकों के विरोध और असहमति जताने के लिए निर्धारित किया गया है, लेकिन अब वहां पहुंचने वाले रास्तों पर भी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल कहां होते हैं।
उन्होंने यह भी पूछा कि हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किए जाने के बाद यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को फिर जुटते हैं, तो क्या सरकार दोबारा पूरी राजधानी में प्रतिबंध लगाएगी।
चुनावी प्रक्रिया पर सवालों का जवाब मांगा
सीजेपी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहा है। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और प्रक्रिया संबंधी कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
थरूर ने कहा कि यदि सरकार को चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भरोसा है, तो उसे सवालों का जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, विरोध को रोकने के लिए राजधानी में कड़े प्रतिबंध लगाने से संदेह और बढ़ सकते हैं।
500 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एहतियाती कार्रवाई के तहत आपराधिक रिकॉर्ड वाले 600 से अधिक अन्य लोगों को भी राजधानी के विभिन्न जिलों में हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की जा रही है।
थरूर ने कहा कि लोकतंत्र की ताकत इस बात से तय होती है कि वह सवाल उठाने वालों के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार को “जवाब देने चाहिए, लाठियां नहीं; अभिव्यक्ति देनी चाहिए, दमन नहीं।”


















