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सज्जन कुमार के घर जाना पड़ा भारी, BJP सांसद ने अकाल तख्त से मांगी माफी

अमृतसर | राजवीर दीक्षित 

(Visiting Sajjan Kumar’s home proved costly; BJP MP Bidhuri apologized to the Akal Takht) अमृतसर से बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली से BJP सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे और पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के घर जाने को अपनी भूल बताते हुए माफी मांगी। बिधूड़ी ने पहले सितंबर में लिखित माफीनामा भेजा था और अब व्यक्तिगत रूप से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के समक्ष पेश हुए।

दरअसल, अगस्त में सज्जन कुमार के निधन के बाद बिधूड़ी समेत दिल्ली के तीन BJP सांसद उनके घर शोक जताने पहुंचे थे। इसको लेकर सिख संगठनों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। विवाद बढ़ने के बाद बिधूड़ी ने 5 सितंबर को अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार को पत्र भेजकर अपने कदम पर खेद जताया था।

अपने स्पष्टीकरण में बिधूड़ी ने कहा था कि वह कुछ साथी सांसदों के कहने पर सज्जन कुमार के घर गए थे और उनका वहां जाना एक गलती थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

बिधूड़ी ने अपने पत्र में 1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर सज्जन कुमार के खिलाफ अपने पुराने रुख का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, 1993 में उन्होंने अन्य नेताओं के साथ तत्कालीन राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर सज्जन कुमार और एचकेएल भगत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने 1996 में भी सार्वजनिक रूप से सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने का दावा किया।

अब व्यक्तिगत रूप से अकाल तख्त पहुंचकर माफी मांगने के बाद इस मामले ने एक और मोड़ ले लिया है।

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बिधूड़ी के माफी मांगने को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि बिधूड़ी ने अपनी गलती महसूस करते हुए अकाल तख्त साहिब के समक्ष माफी मांगी है।

जत्थेदार ने यह भी कहा कि सज्जन कुमार के घर कई अन्य राजनीतिक नेता भी गए थे और उन्हें भी बिधूड़ी की तरह अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सिख समुदाय से माफी मांगनी चाहिए। यह बयान जत्थेदार का है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित निष्कर्ष।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या सज्जन कुमार के घर जाने वाले दूसरे नेता भी अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे?

फिलहाल बिधूड़ी की माफी के बाद यह मामला एक बार फिर पंजाब की सियासत और सिख संगठनों के बीच चर्चा में है।

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