कांगड़ा । राजवीर दीक्षित
(A burden on the public in the name of tolls? Protest against hiked rates on the Shimla-Mataur four-lane highway) शिमला-मटौर फोरलेन पर स्थित घट्टा टोल प्लाजा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। टोल प्लाजा की लोकेशन और स्थानीय वाहन चालकों से की जा रही शुल्क वसूली के खिलाफ आसपास की पंचायतों के प्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है। वहीं, टोल शुल्क 25 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये किए जाने का मामला अब जिला उपभोक्ता फोरम तक पहुंच गया है। स्थानीय लोगों ने इस बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए पुरानी दरें बहाल करने और वाहन चालकों को राहत देने की मांग की है। अधूरे फोरलेन पर बढ़ा टोल शुल्क अब विरोध से लेकर कानूनी शिकायत तक पहुंच गया है।
इस मामले में बनखंडी के अधिवक्ता सुनील कुमार, बानुए दा खूह के सन्नी कौंडल, नैहरनपुखर के सुनील राणा और ज्वालामुखी के अतुल चौधरी ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायतकर्ताओं ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया है। उनका कहना है कि टोल शुल्क निर्धारित करते समय सड़क की वास्तविक स्थिति और वाहन चालकों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने फोरलेन के निर्माण कार्य और उपलब्ध सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरंग अभी चालू नहीं हुई है और फोरलेन के कुछ हिस्सों में धंसाव की समस्या भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़क का काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है, तो टोल शुल्क बढ़ाने का क्या औचित्य है? उनका कहना है कि टोल वसूली सड़क की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप होनी चाहिए। सड़क की अधूरी सुविधाओं और बढ़ी हुई दरों के बीच अब टोल वसूली की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने कम दूरी का सफर करने वाले स्थानीय वाहन चालकों से पूरा शुल्क वसूलने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को कुछ ही किलोमीटर की यात्रा के लिए टोल चुकाना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। शिकायत में मांग की गई है कि स्थानीय वाहन चालकों को राहत दी जाए और पहले लागू 25 रुपये का शुल्क बहाल किया जाए। साथ ही, जब तक फोरलेन की वास्तविक स्थिति और टोल प्लाजा से जुड़ी आपत्तियों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक शुल्क में राहत देने पर विचार किया जाए।
इधर, टोल प्लाजा के विरोध में पंचायत प्रतिनिधियों ने भी अपनी आवाज बुलंद कर दी है। शुक्रवार को आसपास की विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधियों ने एसडीएम डॉ. अंजलि गर्ग से मुलाकात की और टोल प्लाजा को बंद करवाने की मांग के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने स्थानीय वाहन चालकों की समस्याएं रखते हुए जल्द समाधान की मांग की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो टोल प्लाजा पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। अब टोल विवाद ने आंदोलन का रूप लेने के संकेत दे दिए हैं और पंचायतों ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए समयसीमा भी दे दी है।
रानीताल पंचायत के प्रधान अभिनव, तकीपुर के प्रधान पवी कुमार, भंगवार की प्रधान इंदू बाला, दौलतपुर की प्रधान सीमा कुमारी, उपप्रधान एसके सोनी और ओबीसी संघर्ष समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता सौरभ कौंडल ने आरोप लगाया कि घट्टा टोल प्लाजा को गलत स्थान पर स्थापित किया गया है। उनका कहना है कि टोल प्लाजा को मौजूदा स्थान से हटाकर रानीताल-ज्वालामुखी मार्ग पर स्थापित किया जाना चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार, वर्तमान स्थान के कारण आसपास के क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और इस व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।
पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक वर्ष से यहां गलत तरीके से शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि फोरलेन का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। उनका कहना है कि स्थानीय वाहन चालकों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी बार-बार टोल शुल्क देना पड़ता है। इससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए टोल वसूली की व्यवस्था में बदलाव किया जाए और टोल प्लाजा की लोकेशन पर भी दोबारा विचार किया जाए।
इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से समाधान की कोशिश शुरू कर दी गई है। रानीताल पंचायत के प्रधान अभिनव ने बताया कि एसडीएम डॉ. अंजलि गर्ग ने एनएचएआई के अधिकारियों से बातचीत कर समस्या के समाधान के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि तय समयसीमा में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो पंचायत प्रतिनिधियों की चेतावनी के अनुसार घट्टा टोल प्लाजा पर धरना-प्रदर्शन शुरू हो सकता है। फिलहाल, स्थानीय लोग टोल शुल्क में राहत, पुरानी दरों की बहाली और टोल प्लाजा की लोकेशन से जुड़ी आपत्तियों के समाधान की मांग कर रहे हैं।


















