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बेअंत सिंह हत्याकांड: उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा ने पैरोल के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

बेअंत सिंह हत्याकांड: उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा ने पैरोल के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

टारगेट न्यूज़: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा ने एक बार फिर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। हवारा ने अदालत में एक नई याचिका दायर कर चार हफ्ते की नियमित पैरोल देने की मांग की है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि चंडीगढ़ प्रशासन, दिल्ली के जेल महानिदेशक और मंडोली केंद्रीय जेल के अधीक्षक ने हाईकोर्ट के पिछले आदेशों की अवहेलना की है। हवारा के अनुसार, उन्होंने अपनी सजा के 29 साल और एक महीने से अधिक का समय जेल में काट लिया है और कानून के मुताबिक वह पैरोल के हकदार हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी उनकी अर्जी पर जानबूझकर कोई फैसला नहीं ले रहे हैं। इस मामले में अदालत ने सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • जगतार सिंह हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
  • हवारा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चार सप्ताह की नियमित पैरोल की मांग की है।
  • याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने 6 जुलाई 2026 के हाईकोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।
  • हवारा के वकीलों का कहना है कि पंजाब सरकार पहले ही उनकी पैरोल की सिफारिश कर चुकी है।
  • जगतार सिंह हवारा जेल में 29 साल और एक महीने से अधिक का लंबा वक्त गुजार चुका है।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

जगतार सिंह हवारा का यह कानूनी कदम उस लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है जिसके तहत वह पिछले काफी समय से पैरोल हासिल करने का प्रयास कर रहा है। अपनी याचिका में हवारा ने स्पष्ट किया है कि चंडीगढ़ प्रशासन, जेल महानिदेशक (एनसीटी) और मंडोली केंद्रीय जेल के अधीक्षक ने 6 जुलाई 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया है। उस आदेश में अदालत ने मंडोली जेल के अधीक्षक को एक हफ्ते के भीतर हवारा की पैरोल याचिका चंडीगढ़ के गृह सचिव को भेजने का निर्देश दिया था। इसके बाद, चंडीगढ़ प्रशासन को चार हफ्ते के भीतर अपनी टिप्पणियां और सिफारिशें मंडोली जेल अधीक्षक को भेजनी थीं, और उसके आधार पर दो हफ्ते के भीतर अंतिम फैसला लिया जाना था।

याचिका के अनुसार, पंजाब सरकार ने पहले ही सकारात्मक रुख अपनाते हुए हवारा को पैरोल पर रिहा करने की सिफारिश कर दी थी, लेकिन अन्य संबंधित प्रशासनिक और जेल अधिकारियों ने तय समय सीमा के भीतर इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। हवारा ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने सबसे पहले 11 जून 2025 को मंडोली जेल अधीक्षक के समक्ष अपनी पैरोल की अर्जी दाखिल की थी। जब वहां कोई फैसला नहीं हुआ, तो उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि इस मामले में सक्षम प्राधिकारी चंडीगढ़ प्रशासन है, जिसके बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया।

कानूनी जानकारों का मानना है कि इतने लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहने वाले कैदियों के लिए पैरोल के प्रावधान जेल मैनुअल के तहत निर्धारित किए गए हैं, बशर्ते प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। हवारा के वकीलों ने तर्क दिया है कि चूंकि अधिकारियों ने अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया है, इसलिए वे इस मामले में अलग से अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दाखिल कर रहे हैं, ताकि प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए जा सकें।

हम इस अदालत के समक्ष यह प्रार्थना करते हैं कि सभी प्रशासनिक बाधाओं और जानबूझकर की गई देरी को दरकिनार करते हुए, याचिकाकर्ता को चार सप्ताह की नियमित पैरोल प्रदान की जाए क्योंकि वह अपनी सजा का अधिकांश हिस्सा पहले ही काट चुका है और सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। – कानूनी पक्ष

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

इस पूरे घटनाक्रम पर न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों दोनों की पैनी नजर बनी हुई है क्योंकि यह मामला पंजाब के सबसे संवेदनशील राजनीतिक हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। 29 साल से अधिक की लंबी कैद भुगतने के बाद जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर हाईकोर्ट का अगला रुख क्या होगा, यह 28 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा। यदि अदालत पैरोल के पक्ष में कोई कड़ा निर्देश जारी करती है, तो इससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर पड़ेगा। दूसरी ओर, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और अन्य एजेंसियां इस याचिका का किस प्रकार जवाब देती हैं, यह आने वाले दिनों में तय करेगा कि हवारा को राहत मिलती है या नहीं।

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