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पंजाब-चंडीगढ़ की घटना से हिमाचल में बढ़ी सतर्कता, 17 विश्वविद्यालय पुलिस के रडार पर

शिमला । राजवीर दीक्षित

(Alertness heightened in Himachal following Punjab-Chandigarh incident; 17 universities on police radar) पंजाब और चंडीगढ़ की यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई घटनाओं से सबक लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने निजी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। सोमवार को पुलिस मुख्यालय शिमला में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा, छात्रावासों की निगरानी, नशे की रोकथाम और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

विश्वविद्यालयों की सुरक्षा में किसी भी कमी को दूर करने पर जोर

बैठक का मुख्य उद्देश्य पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान करना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना रहा। अधिकारियों ने माना कि विद्यार्थियों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन और पुलिस के बीच नियमित संवाद बेहद जरूरी है। बैठक में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा शिमला, सोलन, मंडी, बद्दी, कांगड़ा और ऊना के पुलिस अधीक्षक भी शामिल हुए। विभिन्न जिलों में स्थित विश्वविद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और जरूरत के अनुसार कदम उठाने पर चर्चा की गई।

एंट्री गेट से हॉस्टलों तक बढ़ेगी निगरानी, होगा संयुक्त सुरक्षा ऑडिट

विश्वविद्यालय परिसरों के प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी बढ़ाने, परिसर में आने वाले आगंतुकों का सत्यापन करने और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। निजी सुरक्षा कर्मियों का पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें नियमित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। सुरक्षा व्यवस्था को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विश्वविद्यालय परिसरों का पुलिस के साथ संयुक्त सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों पर काम किया जाएगा। इसके अलावा, किसी आपात परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा हुई, ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन बिना देरी के एक-दूसरे से संपर्क कर सकें।

चिट्टा और नशे के खिलाफ विश्वविद्यालयों में भी तेज होगा अभियान

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की योजना बनाई गई है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ लड़ाई में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में नशे से जुड़ी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर काम करेंगे। विद्यार्थियों को चिट्टे और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। डीजीपी ने विश्वविद्यालयों से अपील की कि वे एंटी-चिट्टा अभियान को केवल जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे व्यापक जन आंदोलन बनाने में सहयोग करें और विद्यार्थियों को इसकी गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ें।

अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर भी रहेगी नजर

किसी अप्रिय घटना के बाद इंटरनेट मीडिया पर अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए भी विशेष व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा हुई। इसके तहत विश्वविद्यालय प्रशासन पुलिस के साइबर अपराध और मीडिया प्रकोष्ठ के साथ समन्वय करेगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक अधिकृत प्रवक्ता नामित किया जाएगा, जो किसी घटना के संबंध में सही और प्रमाणित जानकारी समय पर उपलब्ध करवाने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकना और किसी भी संवेदनशील स्थिति में तथ्यात्मक जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक नोडल सुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के संपर्क में रहेगा और सुरक्षा संबंधी मामलों में पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करेगा।

112 आपातकालीन सेवा और ‘ट्रैक मी’ सुविधा की जानकारी दी जाएगी

बैठक में डीजीपी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि विद्यार्थियों को इस सेवा के उपयोग और इसकी उपलब्धता के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि किसी संकट की स्थिति में वे तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। विशेष रूप से छात्राओं को महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ‘ट्रैक मी’ सुविधा की जानकारी देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा विश्वविद्यालयों को साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, यातायात स्वयंसेवक योजना में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने और हिमाचल प्रदेश पुलिस के आधिकारिक इंटरनेट मीडिया माध्यमों से जुड़ने की अपील की गई।

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर तैयार करेंगे सुरक्षित माहौल

बैठक में लिए गए इन कदमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, विद्यार्थियों को नशे और साइबर अपराध जैसे खतरों के प्रति जागरूक करना तथा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पंजाब और चंडीगढ़ की यूनिवर्सिटी में हाल की घटनाओं के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है। अब संयुक्त सुरक्षा ऑडिट, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, आगंतुकों के सत्यापन और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

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