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हिमाचल में सरकारी खर्चों में कटौती की तैयारी, मंत्रियों के काफिले पर सरकार का मंथन

शिमला । राजवीर दीक्षित

(Preparations underway to cut government expenditure in Himachal; government deliberating on ministers’ convoys) हिमाचल प्रदेश में अब मंत्रियों के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या कम हो सकती है। राज्य सरकार खर्चों में कटौती करने के लिए एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के मुताबिक, मंत्रियों के काफिले में दो पायलट गाड़ियों की जगह अब केवल एक ही पायलट वाहन रखने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो मंत्रियों के काफिले में लंबे समय से चली आ रही दो पायलट गाड़ियों की व्यवस्था खत्म हो सकती है।

सरकार के इस प्रस्ताव से सरकारी खर्च में कटौती और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

दरअसल, गत शनिवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई थी, लेकिन उस समय अंतिम सहमति नहीं बन पाई। अब सरकार इस मामले में आगे बढ़ने से पहले कैबिनेट मंत्रियों की राय जानना चाहती है। इसके लिए गृह विभाग मंत्रियों से संपर्क करेगा और उनसे पूछा जाएगा कि क्या काफिले में दो पायलट गाड़ियों की जगह एक वाहन रखने की व्यवस्था उचित रहेगी। यदि मंत्री इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हैं, तो इसे दोबारा कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। यानी फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय होना बाकी है।

आर्थिक दबाव के बीच सरकार अब सरकारी खर्चों की समीक्षा कर रही है। ऐसे में मंत्रियों के काफिले में इस्तेमाल होने वाले अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है।

सरकार इस कदम को खर्च में कटौती और उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देख रही है। राज्य सरकार जहां आर्थिक दबाव के बीच गैर-जरूरी खर्चों को नियंत्रित करने पर जोर दे रही है, वहीं मंत्रियों के काफिले में दो पायलट वाहनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि जहां एक वाहन से काम चल सकता है, वहां अतिरिक्त वाहनों और कर्मचारियों की तैनाती से बचा जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।

मौजूदा व्यवस्था के तहत शिमला से रवाना होने वाला पायलट वाहन कई बार मंत्री के साथ ही काफिले में आगे तक चलता रहता है। इसके बाद जब मंत्री किसी दूसरे जिले में पहुंचते हैं, तो वहां का जिला प्रशासन भी अपनी व्यवस्था के अनुसार एक पायलट वाहन उपलब्ध कराता है। ऐसे में मंत्री के काफिले में दो पायलट गाड़ियां शामिल हो जाती हैं। इस व्यवस्था के कारण एक ही काफिले में अतिरिक्त वाहन चलने से ईंधन की खपत बढ़ती है। इसके अलावा सरकारी वाहनों के इस्तेमाल, ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती पर भी अतिरिक्त संसाधन खर्च होते हैं।

यही वजह है कि सरकार अब इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है, ताकि जरूरत के मुताबिक वाहनों की तैनाती सुनिश्चित की जा सके और अनावश्यक खर्च को कम किया जा सके।

हालांकि, पायलट वाहनों की संख्या में बदलाव का प्रस्ताव अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है। गृह विभाग की ओर से मंत्रियों की राय लेने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। यदि सहमति बनती है, तो कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या हिमाचल सरकार मंत्रियों के काफिले में दो पायलट गाड़ियों की व्यवस्था को समाप्त कर एक वाहन तक सीमित करती है या मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सरकार खर्चों पर नियंत्रण और सरकारी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के विकल्पों पर विचार कर रही है।

 

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