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आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-14): आज के पूज्य देव (भगवान विष्णु और श्री महालक्ष्मी), पूजा विधान एवं महात्म्य

आज का धार्मिक दायित्व एवं व्रत कथा (2026-10-14): आज के पूज्य देव (भगवान विष्णु और श्री महालक्ष्मी), पूजा विधान एवं महात्म्य

टारगेट न्यूज़ धर्म-अध्यात्म: 2026-10-14 का विशेष धार्मिक दायित्व, आज के पूज्य देव भगवान विष्णु और श्री महालक्ष्मी की पूजा विधि और पावन व्रत कथा।

🙏 आज के पूज्य देव: भगवान विष्णु और श्री महालक्ष्मी

आज का दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना के लिए अत्यंत मंगलकारी एवं कल्याणकारी है। नियमित रूप से सात्विक आचरण करते हुए दान-पुण्य करने से घर में सुख, शांति और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। इस पावन दिवस पर अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।

🪔 प्रातःकाल पूजा विधान (Puja Vidhan & Mantras):

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का ध्यान करें। ईशान कोण में चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर विग्रह स्थापित करें, तत्पश्चात पंचोपचार विधि से गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें और अंत में आरती कर क्षमायाचना मांगें।

📖 पावन व्रत कथा एवं महात्म्य (Vrat Katha & Sacred Legend):

प्राचीन काल में एक बार नारद मुनि ने लोक कल्याण के लिए भगवान विष्णु से इस व्रत की महत्ता के बारे में पूछा था, तब नारायण ने बताया कि जो भी भक्त विधि-विधान से इस दिन श्री हरि की आराधना करता है उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत के प्रभाव से राजा प्रियव्रत के जीवन में सुख-समृद्धि का पुनः संचार हुआ था और उन्हें आरोग्यता प्राप्त हुई थी। आज के दिन इस कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है तथा बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। कथा के उपरांत चरणामृत और प्रसाद का वितरण अवश्य करना चाहिए।

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