Home Himachal Pradesh हिमाचल में नए जिले बनाने की तैयारी, सरकार ने गठित किया आयोग

हिमाचल में नए जिले बनाने की तैयारी, सरकार ने गठित किया आयोग

 शिमला । राजवीर दीक्षित

(Preparations underway to create new districts in Himachal; government constitutes a commission) हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश में जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों समेत विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए सरकार ने आयोग का गठन किया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसके बाद प्रदेश में नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, मौजूदा इकाइयों के विलय और विभाजन को लेकर निर्णय लिया जा सकेगा।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी राजेश शर्मा को आयोग का सदस्य बनाया गया है। भू-अभिलेख विभाग के निदेशक आयोग के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। आयोग की टीम प्रदेश की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन कर यह आकलन करेगी कि किन क्षेत्रों में नई प्रशासनिक इकाइयों की जरूरत है और कहां मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।
आयोग जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों, विकास खंडों और विभिन्न विभागों के अन्य मंडलों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेगा। इस दौरान जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, सड़क और परिवहन सुविधाओं, प्रशासनिक दक्षता तथा आम लोगों की जरूरतों को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। इसके अलावा आयोग जनप्रतिनिधियों, संबंधित सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श करेगा, ताकि पुनर्गठन को लेकर व्यावहारिक सुझाव जुटाए जा सकें।
नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन से पहले सरकार को उनके लिए जरूरी भवनों, कार्यालयों, आधारभूत ढांचे और कर्मचारियों की व्यवस्था भी देखनी होगी। इसी उद्देश्य से आयोग को संभावित खर्च का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार चाहती है कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए, लेकिन इसके लिए राज्य पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न बढ़े। आयोग मौजूदा कार्यालयों और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के उपाय भी सुझाएगा, ताकि कम खर्च में प्रशासनिक कामकाज को मजबूत किया जा सके।
आयोग का मुख्यालय शिमला में स्थापित किया जाएगा। राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आयोग को आवश्यक दस्तावेज, जनसांख्यिकीय आंकड़े और सचिवालय से जुड़ी सहायता उपलब्ध करवाएंगे। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग आयोग के लिए कार्यालय, कर्मचारी, वाहन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करेगा। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को निर्धारित नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और सरकार की ओर से तय मानदेय दिया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक चर्चा नए जिलों के संभावित गठन को लेकर हो सकती है। यदि प्रदेश में जिलों की सीमाओं का पुनर्गठन किया जाता है, तो कांगड़ा, मंडी और शिमला जैसे बड़े जिलों की प्रशासनिक जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इन जिलों के भौगोलिक विस्तार, जनसंख्या और विभिन्न क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच जैसे पहलुओं का आकलन महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, इन जिलों से नए जिले बनाए जाने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस संबंध में स्थिति आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब आयोग की रिपोर्ट पर सबकी नजरें रहेंगी। क्या हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाए जाएंगे, क्या मौजूदा जिलों की सीमाओं में बदलाव होगा या फिर उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन से ही प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी? इन सभी सवालों के जवाब अगले छह महीनों में तैयार होने वाली रिपोर्ट के बाद सामने आ सकते हैं। सरकार का अंतिम उद्देश्य प्रदेश में प्रशासन को लोगों के और करीब लाना, सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाना और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

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