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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा- सजा प्रतिशोध नहीं बल्कि सुधार का अवसर होनी चाहिए

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा- सजा प्रतिशोध नहीं बल्कि सुधार का अवसर होनी चाहिए

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टारगेट न्यूज़:

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को अपराधी और उसके द्वारा किए गए अपराध के बीच अंतर करना चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य का उद्देश्य दोषियों को सुधारने और उन्हें समाज का एक उपयोगी हिस्सा बनने का मौका देने का होना चाहिए, न कि जेलों को केवल सजा भुगतने की जगह मानना चाहिए। पानीपत अदालत द्वारा आईपीसी की धारा 460 सहपठित धारा 34 के तहत आजीवन कारावास की सजा पाए एक दोषी की समयपूर्व रिहाई के मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें दोषी की समयपूर्व रिहाई की याचिका को एक साल के लिए टाल दिया गया था। अदालत ने निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी लागू नीति और कानून के अनुसार चार सप्ताह के भीतर मामले पर नए सिरे से विचार करे। न्यायमूर्ति गोयल ने आगाह किया कि सजा का उद्देश्य निवारण होना चाहिए, न कि इसे अत्यधिक प्रतिशोध का हथियार बनाकर क्रूर न्याय को बढ़ावा देना चाहिए। अदालत ने रेखांकित किया कि कैदी के जेल में आचरण, मानसिक स्थिति, अपराध की गंभीरता, सामाजिक पृष्ठभूमि और पैरोल के दौरान उसके व्यवहार को समयपूर्व रिहाई का निर्णय लेने से पहले ठीक से परखा जाना चाहिए। इसके साथ ही, अदालत ने समान रूप से स्थित अन्य सह-दोषियों को रिहाई मिलने का हवाला देते हुए राज्य सरकार द्वारा नीति लागू करने में पक्षपात और ‘चुनिंदा’ रवैया अपनाने की आलोचना की।

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