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पंजाब सीएम की पत्नी ने चंडीगढ़ अदालत में कहा, मानहानि के मुकदमे से जस्टिस रंजीत सिंह का नाम हटाने पर कोई आपत्ति नहीं

पंजाब सीएम की पत्नी ने चंडीगढ़ अदालत में कहा, मानहानि के मुकदमे से जस्टिस रंजीत सिंह का नाम हटाने पर कोई आपत्ति नहीं

द टारगेट न्यूज़:

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने चंडीगढ़ की एक अदालत में चल रहे मानहानि के मुकदमे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके वकील ने अदालत में स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और पंजाब मानवाधिकार संगठन (PHRO) के चेयरमैन जस्टिस रंजीत सिंह का नाम प्रतिवादियों की सूची से हटा दिया जाता है, तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। यह घटनाक्रम जस्टिस रंजीत सिंह द्वारा अदालत में एक आवेदन दायर किए जाने के लगभग एक महीने बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने डॉ. गुरप्रीत कौर से नाकाफी आधार पर निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) प्राप्त करने के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग की थी। अदालत में पक्ष रखते हुए डॉ. गुरप्रीत कौर के वकील एडवोकेट सुखबीर सिंह ने बताया कि प्रतिवादी नंबर 2 यानी जस्टिस रंजीत सिंह ने अपने बयान में यह कहा है कि डीडी न्यूज की एंकर और प्रतिवादी नंबर 1 भावना नायर द्वारा किया गया प्रकाशन अधूरा था और उनके वास्तविक बयानों को पूरी तरह से नहीं दर्शाता है। उनका इरादा वादी (डॉ. गुरप्रीत कौर) को बदनाम करने का कभी नहीं था। हालांकि, वादी द्वारा 22 अगस्त 2026 को भेजे गए कानूनी नोटिस का जस्टिस रंजीत सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया था, जिससे वादी उनके रुख से पूरी तरह अनजान थीं और मुकदमे में किसी भी प्रकार की बात छिपाई नहीं गई थी। वादी को जस्टिस रंजीत सिंह के पूरे बयान की जानकारी मुकदमा दायर होने के बाद ही मिल पाई। डॉ. गुरप्रीत कौर के वकील ने यह भी शर्त रखी कि यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भावना नायर के अधूरे प्रकाशन को हटाने पर जस्टिस रंजीत सिंह की ओर से कोई आपत्ति नहीं है, तो उन्हें प्रतिवादियों की सूची से हटाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने जस्टिस रंजीत सिंह के अलावा शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया, कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा और भावना नायर के खिलाफ हर्जाने का मुकदमा दायर किया था। बाद में अदालत ने जस्टिस रंजीत सिंह के खिलाफ 8 सितंबर 2026 को पारित एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को रद्द कर दिया था और उन्हें अपर्याप्त आधार पर निषेधाज्ञा लेने के एवज में मुआवजे के लिए अलग से कार्रवाई करने की छूट दी थी। दूसरी ओर, जस्टिस रंजीत सिंह के वकील एडवोकेट चरणजीत सिंह बख्शी ने डॉ. गुरप्रीत कौर के वकील द्वारा दर्ज कराए गए बयान का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि वादी ने उनके मुक्किल के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले ‘उचित जांच के सिद्धांत’ (डॉक्ट्रिन ऑफ रीजनेबल इन्क्वायरी) का पालन नहीं किया था। मामले की अगली सुनवाई अब 25 नवंबर को होगी, जिसमें इस पर आगे की बहस की जाएगी। जस्टिस रंजीत सिंह ने नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 95 के तहत यह मुआवजा मांगा है, जो अपर्याप्त आधारों पर निषेधाज्ञा प्राप्त करने पर मुआवजे का प्रावधान करती है।

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