द टारगेट न्यूज़:
बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवाला को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में ट्रांसफर करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सुनवाई के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवाला एक उच्च जोखिम वाला कैदी है और उसे पंजाब की जेल में स्थानांतरित करने से राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने आईबी की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कानून-व्यवस्था की स्थिति और आगामी चुनावों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। हवाला का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस रुख पर आपत्ति जताई कि तिहाड़ जेल उच्च सुरक्षा वाले कैदियों के लिए अधिक सुरक्षित है। उन्होंने शीर्ष अदालत से यह भी अनुरोध किया कि दोषी को अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग मां से मिलने की अनुमति दी जाए, जिसके लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में parole की अर्जी लंबित है। आईबी की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पीठ ने कहा कि यदि एजेंसियां इसे बहुत गंभीर मानती हैं, विशेषकर मौजूदा परिदृश्य में जब देश-विदेश में मामले सक्रिय हैं और चुनावों पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, तो वे ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहते। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई अगले साल फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च 2027 को समाप्त होगा और 117 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह हवाला की उस याचिका पर खुफिया ब्यूरो से इनपुट ले, जिसमें उसने तिहाड़ जेल से पंजाब की जेल में ट्रांसफर की मांग की है। बब्बर खालसा का आतंकवादी रहा हवाला 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह 22 जनवरी 2004 को उच्च सुरक्षा वाली बुड़ैल जेल से भाग गया था और एक साल बाद फिर से पकड़ा गया था। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जेल से भागने के उसके इतिहास और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मद्देनजर उसका ट्रांसफर खतरनाक हो सकता है, जिससे सीमावर्ती राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। पंजाब सरकार ने भी अपने हलफनामे में इसी तरह की आशंका जताई थी। दूसरी ओर, हवाला ने अच्छे आचरण, दिल्ली में कोई मामला लंबित न होने, मामलों की सुनवाई के लिए पंजाब आने की आवश्यकता और अपनी बेटी के पंजाब में रहने का हवाला देते हुए ट्रांसफर की मांग की है। साथ ही उसने यह भी कहा कि जेल के महानिदेशक ने लगभग आठ साल पहले 7 अक्टूबर 2016 को उसे पंजाब की जेल में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के बाहर हुए एक विस्फोट में मारे गए थे। हवाला को 21 सितंबर 1995 को गिरफ्तार किया गया था। साल 2007 में एक विशेष सीबीआई अदालत ने हवाला और बलवंत सिंह राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2010 में आजीवन कारावास में बदल दिया था।


















