द टारगेट न्यूज़:
चंडीगढ़ की एक अदालत ने 77 लाख रुपये से अधिक के साइबर धोखाधड़ी मामले में महाराष्ट्र के रहने वाले साजिद अहमद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस संबंध में पुलिस ने मनजीत कौर बिंद्रा की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, 10 जुलाई 2025 को उन्हें एक फोन आया था जिसमें फोन करने वाले ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मुंबई में सिम कार्ड जारी करवाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बैंक खाते खोलने में किया गया है। उन्हें निवेश विवरण साझा करने को कहा गया और यह भी धमकी दी गई कि विवरण न देने पर उनके बैंक खाते सील कर दिए जाएंगे। इसके बाद उन्होंने अपने बैंक जमा खातों की जानकारी साझा कर दी। पीड़िता को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए दो व्यक्तियों से जोड़ा गया जिन्होंने खुद को एसएचओ विजय Khanna और जांच अधिकारी विशाल गुप्ता बताया और पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और उन्हें वारंट भी दिखाए गए। उनसे कहा गया कि केनरा बैंक, मुंबई में एक बैंक खाता खोला गया था जिसका इस्तेमाल जेट एयरवेज के सीईओ नरेश गोयल द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था, और वह संदिग्धों की सूची में शामिल हैं। 10 जुलाई 2025 से 14 जुलाई 2025 तक उन्हें लगातार व्हाट्सएप कॉल पर रखा गया। जालसाजों ने उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित उस याचिका की प्रति भी भेजी जिसमें उनकी संपत्ति कुर्क करने की बात थी, और उन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश की एक प्रति भी दी गई। इन ठगों के निर्देश पर उन्होंने विभिन्न खातों में कुल 77,42,420 रुपये ट्रांसफर कर दिए और उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। इस शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान, आरोपी को 14 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनके मु मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है, उनका नाम प्राथमिकी में नहीं है और इस कथित अपराध से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वहीं, लोक अभियोजक ने विरोध करते हुए कहा कि यह साइबर धोखाधड़ी का गंभीर मामला है जिसमें आवेदक को अपने खाते में 37 लाख रुपये प्राप्त हुए थे जिनका इस्तेमाल उसने खुद किया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार आवेदक के बैंक खाते में धोखाधड़ी के 37 लाख रुपये आए थे और उसने उनका उपयोग किया था, साथ ही वह इन रुपयों के लेनदेन के संबंध में कोई तथ्य स्पष्ट करने में विफल रहा। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।


















