द टारगेट न्यूज़:
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है, जिसके चलते राज्य में ऐसे मामलों का कुल आंकड़ा 3,300 को पार कर गया है। किसानों द्वारा गेहूं की बुवाई की तैयारी के लिए खेतों में अवशेषों को आग लगाए जाने के कारण संगरूर-मलेरकोटला बेल्ट समेत कई ग्रामीण इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार धुंध और स्मॉग जैसी स्थिति छाई हुई है, जिससे दिन के समय भी दृश्यता कम हो गई है और हवा में जली हुई पराली की राख उड़ती नजर आ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को पंजाब के छह निगरानी वाले शहरों में से पांच शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। शनिवार को दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, पटियाला का AQI 204, लुधियाना का 222, खन्ना का 201, जालंधर का 205, मंडी गोबिंदगढ़ का 281 और अमृतसर का 115 रहा। राष्ट्रीय वर्गीकरण के तहत 201 से 300 के बीच का AQI ‘खराब’ श्रेणी में आता है, जो स्वस्थ व्यक्तियों में भी सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकता है और श्वसन तथा हृदय संबंधी बीमारियों को गंभीर बना सकता है। ग्रामीण इलाकों में इस जहरीले धुएं का सबसे बुरा प्रभाव स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग गले में खराश, बुखार, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक है, लेकिन विडंबना यह है कि वायु गुणवत्ता की निगरानी केवल शहरी केंद्रों पर ही की जाती है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास गांवों में निगरानी उपकरण स्थापित करने के लिए धन की कमी है, जिसके कारण नेटवर्क केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है।













