द टारगेट न्यूज़:
ओमान के अल अमेरत क्रिकेट ग्राउंड में खेले जा रहे एसीसी मेंस अंडर-19 एशिया कप के ग्रुप ए मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ शुरुआती झटकों से उबरते हुए मैच में वापसी की। कमेंटेटरों द्वारा ‘जालंधर का धुरंधर’ कहे जाने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाज अर्जुन राजपूत ने इस मुकाबले में 107 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली और टीम को एक बेहद मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, लेकिन पारी की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान लक्ष्या रायचंदानी पारी की दूसरी ही गेंद पर अली रजा का शिकार बनकर बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद पाकिस्तानी गेंदबाजों ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। वीके विनीत (8 रन) और यशवर्धन चौहान (1 रन) के सस्ते में आउट होने के बाद 11.4 ओवरों में भारत का स्कोर 34 पर 3 विकेट हो गया था। पिछले मैच में नाबाद 70 रन बनाने वाले आर्यावीर सहवाग भी 17वें ओवर में निकैब शफीक की गेंद पर मोहम्मद संयम को कैच थमा बैठे, जिससे भारत का स्कोर 42 रन पर 4 विकेट हो गया। इसके बाद स्कोर 86 रन पर 5 विकेट हो गया जब अन्वय द्रविड़ भी आउट होकर पवेलियन लौट गए। ऐसे संकटपूर्ण समय में अर्जुन राजपूत ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी आक्रामक और सूझबूझ भरी बल्लेबाजी के दम पर पारी को संभाला। राजपूत ने 20वें ओवर में अली रजा के खिलाफ 10 रन बटोरे और महज 43 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 24वें ओवर तक भारत का स्कोर 95 रन पर 5 विकेट था, जिसके बाद उन्होंने पारी को आगे बढ़ाते हुए 26वें ओवर में टीम का स्कोर 100 के पार पहुंचाया। अंततः उन्होंने शानदार शतक जड़ते हुए 107 रनों की पारी खेली और आउट होने से पहले टीम को एक सम्मानजनक स्थिति में पहुंचा दिया। इस मुकाम तक पहुंचने का अर्जुन का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उनके पिता होती राम ने जालंधर के राम नगर में वर्षों तक रेहड़ी पर छोले-कुल्चे बेचे और बाद में एक बेकरी शुरू की। अर्जुन ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी से की थी। अकादमी बंद होने के बाद उनके कोच ने उनकी स्कूल की फीस माफ करवा दी थी ताकि उनका खेल जारी रह सके। अपने इस संघर्ष के बल पर उन्होंने इसी साल जुलाई में श्रीलंका दौरे के दौरान भारत की अंडर-19 टीम के लिए पदार्पण किया था।













