नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Aadhaar Biometric Lock: New Shield Against Bank Fraud)डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां आधार कार्ड हर नागरिक की पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है, वहीं इससे जुड़ी साइबर ठगी भी तेजी से बढ़ रही है। अब ठगों ने ऐसा तरीका अपना लिया है, जिसमें न तो ओटीपी आता है और न ही कोई कॉल, लेकिन पलक झपकते ही बैंक खाता खाली हो जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहे ऐसे मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, आधार कार्ड में मौजूद बायोमेट्रिक डेटा—फिंगरप्रिंट और आंखों की स्कैनिंग—ठगों का नया हथियार बन गया है। कई बार आधार सेवा केंद्रों या फर्जी माध्यमों से यह संवेदनशील जानकारी चुरा ली जाती है और उसी के जरिए बैंक खातों की केवाईसी, सिम कार्ड एक्टिवेशन या अन्य वित्तीय लेन-देन कर लिए जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगती और उसे ठगी का पता तब चलता है, जब वह बैंक स्टेटमेंट चेक करता है।
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इस बढ़ते खतरे को देखते हुए UIDAI ने आधार बायोमेट्रिक लॉकिंग की सुविधा को सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय बताया है। बायोमेट्रिक लॉक करने के बाद फिंगरप्रिंट, आंख और चेहरे से जुड़ा डेटा पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है और बिना आपकी अनुमति कोई भी इसका उपयोग नहीं कर सकता। इससे फर्जी सिम लेना, गलत केवाईसी कराना या बैंक खाते से छेड़छाड़ करना लगभग असंभव हो जाता है।
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अच्छी बात यह है कि आधार बायोमेट्रिक लॉक करने की प्रक्रिया बेहद आसान है और इसे घर बैठे UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए पूरा किया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि हर आधार धारक को तुरंत यह ‘डिजिटल ताला’ लगाना चाहिए, ताकि बढ़ती साइबर ठगी से खुद को और अपने बैंक खाते को सुरक्षित रखा जा सके। आज थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी आर्थिक हानि से बचा सकती है।

















