टारगेट न्यूज़ एक्सप्लेनर: आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे और भारतीय जनता पार्टी की ‘नशा विरुद्ध यात्रा’ के समापन समारोह में शामिल होने पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। आप ने आरोप लगाया कि पंजाब में अवैध नशों का जो काला कारोबार आज गंभीर समस्या बन चुका है, उसकी शुरुआत असल में 2007 से 2017 के बीच शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन की सरकार के कार्यकाल के दौरान ही हुई थी। गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों जालंधर के दौरे पर हैं और वे भाजपा द्वारा निकाली गई 14 दिवसीय नशा मुक्ति यात्रा के समापन कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इस सियासी वाकयुद्ध ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर से नशा के संवेदनशील मुद्दे को गरमा दिया है, जिस पर राज्य और केंद्र के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आप के नेताओं ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर राजनीति करने और दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा इस यात्रा के जरिए राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था और नशा तस्करी पर लगाम लगाने में विफल रहने का आरोप लगा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने आने वाले दिनों में पंजाब के राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।
5 प्रमुख बातें जो आपको जाननी चाहिए (5 Key Takeaways)
- आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पंजाब यात्रा पर सवाल खड़े किए हैं और इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया है।
- आप नेताओं का दावा है कि पंजाब में ड्रग्स का नेटवर्क 2007 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय फैला था।
- पार्टी ने आरोप लगाया कि उस समय के शासकों और तस्करों के बीच मिलीभगत थी, जिसे तत्कालीन गठबंधन सरकार ने संरक्षण दिया था।
- आप सरकार ने राज्य में ‘युद्ध नशे्यों विरुद्ध’ और विलेज डिफेंस कमेटियों जैसी पहलों के माध्यम से नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का दावा किया है।
- आप ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा और गुजरात के बंदरगाहों के जरिए होने वाली तस्करी रोकने में केंद्र विफल रहा है।
मामला क्या है? (Understanding the Core Issue)
पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही है। ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर में भाजपा की ‘नशा विरुद्ध यात्रा’ के समापन समारोह में हिस्सा लिया। इस यात्रा के जरिए भाजपा ने पंजाब की मौजूदा आप सरकार को घेरने की कोशिश की और दावा किया कि राज्य में नशा माफिया पूरी तरह से सक्रिय है। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखे हमले किए। अरोड़ा ने कहा कि हालांकि वे गृह मंत्री का पंजाब में स्वागत करते हैं ताकि वे नशे की समस्या को खत्म करने की नीयत दिखा सकें, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछली अकाली-भाजपा सरकार के समय ड्रग रैकेट में लिप्त नेताओं को क्यों बचाया गया। आप का तर्क है कि जब केंद्रीय एजेंसियों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच की आंच बड़े राजनीतिक चेहरों तक पहुंची थी, तो उस समय के जांच अधिकारियों का तबादला क्यों कर दिया गया और मामलों को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया। पार्टी का कहना है कि आज जो लोग विपक्ष में बैठकर नशाखोरी के खिलाफ उपदेश दे रहे हैं, उन्होंने ही अपने शासनकाल में इस नासूर को बढ़ावा दिया था और अब वे मौजूदा सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
मुख्य कारण और वजहें (Root Causes)
पंजाब में नशे के मुद्दे की जड़ें काफी गहरी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे भौगोलिक, राजनीतिक और प्रशासनिक कई कारण जिम्मेदार रहे हैं। सबसे पहला और मुख्य कारण पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा का होना है, जो पाकिस्तान से सटी हुई है। इसके अलावा, देश के अन्य राज्यों के बंदरगाहों के रास्ते मादक पदार्थों की देश के भीतर तस्करी होती है। आप नेताओं का यह भी आरोप है कि साल 2007 से 2017 के दशक को ‘नारको टेररिज्म’ का दौर कहा जा सकता है, जहां पुलिस, राजनेताओं और ड्रग तस्करों का एक मजबूत गठजोड़ बन गया था। इस दौरान बड़े पैमाने पर हेरोइन और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स पंजाब के युवाओं तक पहुंचे, जिससे पूरा का पूरा युवा वर्ग इसकी गिरफ्त में आ गया। राजनीतिक संरक्षण के अभाव में इस अवैध नेटवर्क का फलना-फूलना असंभव था, और यही कारण है कि आज भी जब इस पर बहस होती है, तो अतीत के पन्ने पलटने लाजिमी हो जाते हैं। इसके साथ ही, बेरोजगारी और आर्थिक निराशा भी युवाओं को नशे की तरफ धकेलने में एक बड़ा सामाजिक कारक रही है, जिसका फायदा तस्कर उठाते हैं। वर्तमान में आप सरकार का दावा है कि उन्होंने सत्ता में आते ही इस चेन को तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की हैं और संपत्ति जब्त की है, लेकिन तस्करों के अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय की अत्यधिक आवश्यकता है।
हम केवल गृह मंत्री से यह अनुरोध करते हैं कि वे पंजाब के लोगों को यह साबित करें कि केंद्र सरकार जो कहती है और जो करती है, उसमें कोई अंतर नहीं है। केंद्र को आप सरकार के प्रयासों में बाधा डालने के बजाय नशे के खिलाफ इस लड़ाई में मदद करनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी और ब्लेम गेम खेलना चाहिए। – अमन अरोड़ा, आप पंजाब अध्यक्ष
निष्कर्ष और आगे का रास्ता (Conclusion & Outlook)
पंजाब में नशा मुक्ति का मुद्दा केवल राजनीतिक रोटियां सेकने का जरिया नहीं बनना चाहिए, बल्कि यह राज्य के अस्तित्व और भविष्य का सवाल है। जब तक सभी राजनीतिक दल, केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन अपनी संकीर्ण राजनीतिक दूरियों को भुलाकर एक साझा और मजबूत रणनीति नहीं बनाते, तब तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकलना कठिन होगा। जनता अब केवल जुबानी جمع-खर्च सुनने के बजाय धरातल पर ठोस परिणाम देखना चाहती है। यह समय आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलने का नहीं, बल्कि एक समन्वित और कठोर कार्रवाई का है ताकि पंजाब की युवा पीढ़ी को इस दलदल से पूरी तरह बाहर निकाला जा सके। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें इस गंभीर राष्ट्रीय और सामाजिक चुनौती से निपटने के लिए किस प्रकार एक साथ मिलकर आगे बढ़ती हैं।














